राज्यसभा में लोकपाल बिल पर पेश हुए 173 संशोधन

विपक्ष और कांग्रेस के साथ यूपीए में शामिल घटक दलों ने मिलकर राज्य सभा में पेश किए गए लोकपाल बिल पर 173 संशोधन प्रस्ताव पेश किए हैं। जिसके बाद ऐसी संभावना कम ही नजर आ रही है कि यूपीए सरकार बहुमत के लिए जरूरी 122 वोट अपने हक में डलवा पाएगी। कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक के बाद लोकपाल बिल पर स्थिति साफ हो सकती है। इस बैठक के बाद लोकपाल बिल को सलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाएगा।
अगर लोकपाल बिल को सलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाता है तो इस पर संशोधन के बाद फिर से राज्य सभा में लोकपाल बिल पर चर्चा हो सकती है। संसद के शीतकालीन सत्र का यह आखिरी दिन है। जिस वजह से यह साफ है कि लोकपाल बिल संसद के शीतकालीन सत्र में पास होना मुश्किल है। सरकार लोकपाल बिल के लिए संसद का ज्वाइंट सेशन बुलाए अभी तक इसके भी संकेत नहीं मिले हैं।
लोकपाल बिल जब लोकसभा में पेश किया गया था तो बीएसपी और सपा ने वॉकआउट कर दिया था। जिस वजह से सरकार इस लोकसभा में पास कराने में कामयाब रही थी। अब सपा ने 7 संशोधन पेश किए हैं और अगर सरकार इन संशोधनों पर गौर नहीं करती है तो वह भी उसके खिलाफ वोटिंग कर सकती है। इसके अलावा घटक दल तृणमूल कांग्रेस ने 37 संशोधन पेश किए हैं। जिससे ऐसे आसार नजर आ रहे हैं कि ममता बनर्जी राज्स सभा में कांग्रेस के साथ खड़ी नहीं होगी।
मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने 25, सीपीएम ने 22, टीडीपी ने 23, एआईडीएमके ने 41 और सीपी आई ने 4 संशोधन प्रस्ताव पेश किए हैं। इन संशोधनों में सबसे बड़ा मामला राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर है। विपक्षी दल इसे राज्य की सरकारों में केंद्र के हस्तक्षेप मान रही है। वहीं केंद्र सरकार यह दलील दे रही है कि उसके पास किसी भी राज्य के लिए कानून बनाने की ताकत है।
राज्य सभा में लोकपाल बिल मामले पर कांग्रेस और भाजपा में तलवारें खिचती हुई नजर आईं। कांग्रेस ने विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी को चेतावनी दी कि अगर राज्य सभा में लोकपाल बिल पास नहीं हो पाया तो इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगा। वहीं भाजपा का कहना है कि सरकार अपने कमजोर लोकपाल बिल को पास कराना चाहती है।












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