सरकार के जाल में फंस गई टीम अन्ना

Team Anna
दिल्ली (ब्यूरो)। लोकपाल के मुद्दे पर दिल्ली में भले ही सरकार हार गई हो पर मुंबई में वह बाजी जितने में कामयाब रही। इसी की परिणति है कि टीम अन्ना को न केवल अपना अनशन तोड़ना पड़ा बल्कि जेल भरो आंदोलन और सांसदों को घेरने की रणनीति से भी पीछे हटना पड़ा। सियासी गलियारे में चर्चा है कि जिस सरकार के प्रबंधकों पर सरकार को संभालने की जिम्मेदारी थी वे भले ही अपना काम ठीक से नहीं कर पाए हो पर जिनपर अन्ना के अनशन को डिस्टर्ब करने की जिम्मेदारी थी वे पूरी तरह से अपने दायित्व को निभाने में सफल रहे।

सूत्र बता रहे है कि अन्ना का जाल में फंसाने की जिम्मेदारी स्थानीय कांग्रेसी नेताओं को दी गई थी। उन्होंने ही अपनी सही रणनीति की बदौलत टीम अन्ना को मात दी और टीम अन्ना उनकी रणनीति के जाल में फंसती चली गई। इस रणनीति के तहत टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल की मुस्लिम नेताओं के साथ मुलाकात होनी थी। मुलाकात जिमखाना में रखा गया था। पर एक कांग्रेसी नेता के दबाव में यहां बैठक नहीं होने दिया गया। क्योंकि इससे संदेश जाता कि पूरा मुस्लिम तबका अन्ना के साथ है। इसका कारण जिमखाना पूरे मुस्लिम समुदाय को प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि टीम अन्ना ने भी इस जगह को भी इसीलिए चुना था कि मुस्लिमों को अपने पक्ष में करने का संदेश लोगों के बीच जाए। पर एक कांग्रेस नेता के दबाव में यहां बैठक नहीं होने दी गई औऱ अंततः टीम अन्ना को बैठक दूसरी जगह करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

एमएमआरडीए मैदान देने की पेशकश की। बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स स्थित एमएमआरडीए मैदान तक आना आम मुंबई वासियों के लिए मुश्किल माना जाता है तो बाहर से आने वालों के लिए कितनी तकलीफ हुई होगी इसका आप अंदाजा आप लगा सकते हैं। यहां आने-जाने के लिए यातायात के साधन आम दिनों में भी मुश्किल से मिलते हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि सरकार ने धीरे से यहां के सार्वजनिक परिवहन को भी कम कर दिया था। वहीं टीम अन्ना का भी आरोप है कि बांद्रा और कुर्ला जैसे नजदीकी रेलवे स्टेशनों पर अन्ना के आंदोलन में आने वालों को सुनियोजित तरीके से गुमराह भी किया जाता रहा। इस समस्या से निपटने के लिए टीम अन्ना को लोगों को अनशनस्थल तक ले जाने के लिए उक्त दोनों रेलवे स्टेशनों पर नियमित अंतराल पर कुछ बसों का भी इंतजाम करना पड़ा। यहीं नहीं टीम अन्ना को एमएमआरडीए मैदान में फंसाने के लिए युवक कांग्रेस ने 27 से 29 दिसंबर तक के लिए आजाद मैदान की बुकिंग करवा ली थी ताकि टीम अन्ना यहां न आ सके। जिससे अन्ना समर्थक कम आ सके औऱ आंदोलन की हवा निकाल सके। हालांकि हुआ भी ऐसा ही।

सूत्रों ने बताया कि सरकार ने संचार साधनों का भी खुलकर दुरुपयोग किया। सरकार को अगस्त के आंदोलन के दौरान अन्ना से सहानुभूति रखने वालों को एसएमएस के जरिए आंदोलन की हर गतिविधि की जानकारी देने की बात की जानकारी थी इसलिए उसने यहां कुछ समय के लिए संचार साधनों को भी ठप्प करा दिया। हालांकि इसे तकनीकी गड़बड़ी का नाम दिया गया है। पर सच्चाई यह है कि सरकार ने दबाव डालकर कई कंपनियों के फोन यहां दिन भर के लिए ठप करा दिया।

फलस्वरूप इस बार टीम अन्ना अपनी गतिविधियों की पूरी जानकारी अपने समर्थकों तक पहुंचा ही नहीं सकी। इस बार टीम अन्ना के पास संदेश भेजने के लिए सबसे बड़ा हथियार ई-मेल था, जिससे देश का आम नागरिक आज भी बहुत दूर है। सूत्रों का कहना है कि इस अन्ना के अनशन को बीच में टूट जाने से स्थानीय कांग्रेसी नेताओं में खुशी का माहौल है वहीं अनशन टूटने से अन्ना समर्थकों में निराशा है।

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