नकली दवाएं बनाने वाला गिरोह पकड़ा गया

Two arrested for making spurious ayurvedic drugs
दिल्ली (ब्यूरो)। पुलिस ने दिल्ली में नकली आयुर्वेदिक दवाइयां बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। ये लोग बरेली में दवाइयां बनाते ते थे। इनके कब्जे से भारी मात्रा में मर्दाना ताकत बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक दवाएं बरामद की गई हैं। ये नकली दवाइयां दिल्ली, गाजियाबाद और लखनऊ में स्थित केमिस्ट दुकानों पर सप्लाई करते थे।

पुलिस ने मर्दाना ताकत और जवानी लौटाने वाली नकली आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने की यूनिट का पर्दाफाश कर गीता मंदिर, बदायूं (यूपी) निवासी कपिल वैश (29) और गांव धानोआ, बरेली (यूपी) निवासी विक्रम सिंह (38) को गिरफ्तार किया है। बरेली में छापेमारी के लिए दिल्ली पुलिस ने बरेली के ड्रग्स इंस्पेक्टर का सहयोग लिया था। इनके कब्जे से भारी मात्रा में मर्दाना ताकत बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक दवाएं बरामद की गई हैं। ये नकली दवाइयां दिल्ली, गाजियाबाद और लखनऊ में स्थित केमिस्ट दुकानों पर सप्लाई करते थे। कपिल एएमयू से एमकॉम किया हुआ है।

एक सूचना पर 22 दिसंबर को पुलिस ने लालकिले के पास से कपिल को गिरफ्तार कर रेगुलीन फोर्ट के 30 बॉक्स और रिचार्ज प्लस के 60 बॉक्स बरामद किए गए हैं। इनमें रेगुलीन फोर्ट के 600 और रिचार्ज प्लस के 3600 कैप्सूल थे। इसने बताया कि ये नकली कैप्सूल बरेली स्थित एक फैक्टरी में बनाए जाते हैं। पुलिस ने बरेली के ड्रग्स कंट्रोल विभाग का सहयोग लेकर प्लाट नंबर 60, भोजीपुर औद्योगिक क्षेत्र में दबिश देकर विक्रम सिंह को पकड़ लिया।

यहां से नकली दवाइयां बनाने और पैकिंग करने वाली मशीनें बरामद हुईं। फैक्टरी का मालिक यू. खान भाग निकला। कपिल ने बताया कि नकली दवाएं उसे गाजियाबाद का मनोज भी देता था। मनोज फरार है। वह नकली दवाइयों को दिल्ली के भागीरथ पैलेस, गाजियाबाद और लखनऊ में स्थित केमिस्ट दुकानों पर सप्लाई करता था।

पुलिस के अनुसार 900 रुपये में बिकने वाली रेगुलीन फोर्ट ओरिजनल दवा मात्र 70 रुपये की लागत से बताई जाती है। इसी दवा को होलसेल मार्केट में 230 रुपये में बेचते थे। 900 रुपये में बिकने वाली रिचार्ज प्लस को बनाने में सिर्फ 72 रुपये की लागत आती थी। इसे होलसेल बाजार में 250 रुपये में बेचा जाता था। एएमयू यूनिवर्सिटी से एमकॉम कर चुका कपिल पिछले तीन साल से नकली दवाइयों की सप्लाई कर रहा था। वह 10 से 12 लाख की नकली दवाइयां सप्लाई कर चुका है। वह बदायूं (यूपी) में पिता की गारमेंट शॉप पर भी सहायता करता था। विक्रम सिंह बरेली स्थित जनरेटर बनाने वाली फैक्टरी में काम करता था। रात में वह नकली आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने की फैक्टरी में काम करता था।

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