22 सोशल नेटवर्किंग साइटों को 13 जनवरी तक मोहलत

याहू इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और माइक्रोसॉफ्ट की ओर से अदालत में मौजूद प्रतिनिधि ने कहा कि उन्हें अदालत के आदेश और शिकायत की प्रति नहीं मिली है। इस पर अदालत ने दोनों बेवसाइट के प्रतिनिधियों को आदेश और शिकायत की प्रति उपलब्ध कराने के आदेश दिए। साथ ही, अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि 13 जनवरी तक वेबसाइट से आपत्तिजनक चीजों को हटाकर अदालत को रिपोर्ट करें।
दरअसल, शिकायतकर्ता मुफ्ती एजाज अरशद काजमी ने रोहिणी कोर्ट में एक सिविल शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसमें 22 सोशल साइट को पार्टी बनाया गया था। इसमें कहा गया था कि आपत्तिजनक सामग्री दिखाई जा रही है। इससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा है। बच्चे भी इनका इस्तेमाल करते हैं। लिहाजा, इन पर दिखाई जाने वाली आपत्तिजनक सामग्री को हटाया जाए।
इससे पहले मुफ्ती ऐजाज अरशदकासमी द्वारा दायर सिविल वाद पर अदालत ने अर्जी पर सुनवाई करते हुए 22 सोशल नेटवर्किंग साइट्स को समन जारी करते हुए 24 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा था। साथ ही वादी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और सीडी को सीलबंद लिफाफेमें रखने का आदेश भी कोर्ट स्टाफ को दिया। जज ने कहा कि मैंने वादी द्वारा पेश दस्तावेजों, तसवीरों और सीडी को देखा था। ये आपत्तिजनक, बदनाम करने वाले और हर समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाले थी।
लिहाजा प्रथम दृष्ट्या ये मामला वादी केपक्ष में दिखाई देता है। अगर प्रतिवादियों को आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश न दिया गया तो न सिर्फ वादी बल्कि हर उस शख्स की भावनाएं आहत होंगी जिसकी धार्मिक आस्थाएं हैं और इस नुकसान की भरपाई पैसे से नहीं की जा सकेगी।












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