ओसामा बिन लादेन की मौत 2011 की सबसे बड़ी खबर

मिस्र में निरंकुश शासक हुस्नी मुबारक के शासन का अंत भी काफी चर्चा में रहा। जिसके बाद गल्फ व अफ्रीकी देशों में निरंकुश शासन की नींव उखड़नी शुरू हो गई। मिस्र में निरंकुश शासन के अंत के बाद लीबिया में लोकतंत्र की स्थापना हुई और वहां के निरंकुश शासक गद्दाफी को बुरी मौत मिली। जिसके बाद सीरिया में भी निरंकुश शासन के उखड़ने की लहर तेज हो गई है। इस लिहाज से यह निरंकुश शासन के पतन की शुरुआत मानी जा रही है। इस साल दुनिया के नक्शे में दक्षिण सूडान को जगह मिली। कुल देश 193 हो गए।
जापान में समुद्र की लहरों ने एक बार फिर त्रासदी मचाई। जिसने वहां की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया। जिसके बाद वहां के प्रधानमंत्री नाओतो कान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस त्रासदी के बाद वहां विकिरण फैलने का खतरा पैदा हो गया था। इस साल चीन में भी भयंकर बाढ़ आई जिसमें सैंकड़ों लोगों की जान गई।
यूरोप के देशों की बैठती अर्थव्यवस्था भी इस साल चर्चा का विषय रही। वहां की अर्थव्यवस्था को संभालने वाले 2 प्रमुख देश इटली व स्पेन बुरी तरह कर्ज में ठूब गए। यूरो के खराब दौर में पहुंचने के बाद पूरी दुनिया में 2008 की मंदी के लौटने की आशंका पैदा हो गई। इटली की डूबती अर्थव्यवस्था के चलते वहां की सरकार को हटना पड़ा। दुनिया की राजनीति में पहली बार ऐसा हुआ कि वहां की सरकार में एक भी राजनीतिज्ञ नहीं शामिल था। अर्थशास्त्रियों ने मिलकर वहां की नई सरकार की नींव रखी।
इसी साल के अंत में अमेरिका की सेना ने इराक को खाली कर दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस युद्ध को सफल करार देते हुए इराक से अपनी सेना वापस बुलाने की घोषणा की। नाटो सेना ने पाकिस्तान की सेना पर हमला बोला जिसमें 25 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। जिसके बाद पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों में खटास आई। पाकिस्तान ने अमेरिका को देश खाली करने की धमकी दे डाली।
एशिया में चीन और भारत के बिगड़ते रिश्ते भी इस साल काफी चर्चा में रहे। भारत दक्षिणी सागर में तेल खोज का अभियान चलाना चाह रहा था। जिसका चीन विरोध कर रहा है। चीन ने प्रशांत महासागर में अपनी जल सेना को उतारने का फैसला किया। जो भारत को चारों ओर से घेरने का फैसला माना जा रहा है।












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