कारवालों सावधान, नहीं मिलेगा सस्ता डीजल

समिति के मुताबिक 33 फीसदी डीजल यही उपयोग करते हैं। समाज के उच्च वर्ग को सीमित संख्या में सब्सिडी प्राप्त दरों पर सालाना रसोई गैस मुहैया कराने की योजना पर भले ही सरकार अभी निर्णय नहीं ले पाई है। लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय संबंधी संसद की स्थायी समिति ने इस योजना पर अगले तीन माह के अंदर कार्रवाई करने की सिफारिश की है। ऐसा होता है तो सालाना एक निश्चित संख्या से ज्यादा रसोई गैस लेने पर उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 650 रुपये से ज्यादा चुकाना पड़ सकता है जिसकी मौजूदा सब्सिडी प्राप्त कीमत 399 रुपये है।
समिति ने कहा है कि ऐसे लोग जिनकी सालाना आय छह लाख से ज्यादा है उन्हें रियायती दरों पर रसोई गैस नहीं मिलनी चाहिए। इस श्रेणी में मंत्रियों, सरकारी प्रतिनिधियों और आला अधिकारियों को भी रखा गया है। समिति का कहना है कि ऐसा करने से सरकार को ग्रामीण इलाकों में सब्सिडी प्राप्त एलपीजी वितरण करने में सहायता मिलेगी। और गांवों में आसानी से स्वच्छ ईंधन भी उपलब्ध हो सकेगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा है कि फिलहाल यह योजना सरकार के विचाराधीन है। समिति का कहना है कि इस वजह से सरकार पर रोजाना सब्सिडी बोझ बढ़ता जा रहा है। इसलिए इस मामले को प्रमुखता से लेते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए। मालूम हो कि रियायती दरों पर रसोई गैस की बिक्री से तेल कंपनियों को फिलहाल प्रति सिलेंडर 260 रुपये 50 पैसे का नुकसान हो रहा है। जबकि पिछले छह माह में रसोई गैस बिक्री पर कंपनियों को 13 हजार 820 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है।












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