आरक्षण्ा के मुद्दे पर कांग्रेस ने लगाई कांग्रेस से गुहार

आखिर केंद्र के स्तर पर उन्हें पिछड़े वर्ग में क्यों नहीं शामिल किया जा सकता? यह मांग लंबे समय से चली आ रही है और मैं समझता हूं कि यह न्यायोचित है। सिंह ने कहा कि ये कैसे हो सकता है कि नोएडा में जाटों को पिछड़ा माना जाए और दिल्ली में नहीं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने और अजित सिंह ने चिदंबरम से आग्रह किया कि जाटों के आरक्षण की प्रक्रिया तेज की जाए।
यह पुरानी मांग है जिसे पूरा किया जाना चाहिए। दिल्ली, पंजाब, उत्तरप्रदेश , मध्यप्रदेश की राज्य सूची में जाट पिछड़े वर्ग के रूप में सूचीबद्ध हैं लेकिन केंद्रीय सूची में ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल और कांग्रेस पार्टी दोनों ने जाटों को केंद्रीय सूची में शामिल करने की मांग का समर्थन किया है। सिंह ने बताया कि चिदंबरम ने उनकी मांग ध्यान से सुनी और कहा कि इस बारे में जैसे ही पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आती है, फैसला किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि कैबिनेट में कल ही एक बड़ा फैसला करते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण में अल्पसंख्यकों के लिए 4.5 प्रतिशत कोटा तय कर दिया है। उत्तरप्रदेश सहित पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इसे महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसला माना जा रहा है और उम्मीद है कि जाटों को आकर्षित करने के उद्देश्य से उनके आरक्षण पर भी संभवत: जल्द फैसला हो।












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