‘वन्स ऑपन एक टाइम इन मुंबई’ से सीखा, एंबुलेंस से शराब की तस्करी

अवैध शराब वैन में मरीज के लिए बने स्टैचर के नीचे छिपाकर रखी जाती थी। पुलिस गिरोह में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है। पुलिस के अनुसार एक सूचना पर वाहनों की जांच के दौरान रात करीब ढाई बजे शिवालिक रोड पिकेट पर जल बोर्ड ऑफिस के पास सायरन बजाती हुई एंबुलेंस आती दिखाई दी। पुलिसकर्मियों ने जब एंबुलेंस को रोकने का इशारा किया तो चालक ने रफ्तार बढ़ा दी। पुलिसकर्मियों ने बेरीकेड्स लगाकर एंबुलेंस को रोका।
परमिंदर यादव एंबुलेंस चला रहा था। राकेश मरीज बनकर एंबुलेंस में लेटा था जबकि जितेंद्र मरीज का केयरटेकर बना हुआ था। पुलिस के अनुसार इन्हें एंबुलेंस से शराब तस्करी का आइडिया फिल्म ‘वन्स ऑपन एक टाइम इन मुंबई’ से मिला था। करीब आठ महीने से तस्करी तीनों एक दिन में 15 से 20 हजार रुपये कमा लेते थे। पश्चिम बंगाल में अवैध शराब से हुई मौतों के बाद इसे मालवीय थाने की बड़ी उपलब्धि बताई जा रही है। तीनों ने बताया कि अवैध शराब को गुड़गांव स्थित शराब के ठेकों से लाते थे और एनसीआर समेत यूपी के मेरठ, दादरी के पड़ोसी इलाके, फरीदाबाद, भरतपुर, मथुरा, अलवर और मेवात में सप्लाई करते थे। ये एक दिन में एक से दो चक्कर लगा देते थे। गिरोह सरगना परमिंदर गुड़गांव स्थित कपूर हास्पिटल में एंबुलेंस चलाता था। करीब एक साल पहले वह मारुति वैन खरीदकर एंबुलेंस के रुप में चलाने लगा। ज्यादा बचत नहीं होने पर वह एंबुलेंस से शराब की तस्करी करने लगा।
पुलिस के अनुसार इस तरह से तस्करी का आइडिया फिल्म ‘वन्स ऑपन ए टाइम इन मुंबई’ से मिला था। ये ज्यादातर रात में शराब की तस्करी करते थे। जब पुलिस आदि चेकिंग के लिए रोकती तो एक तस्कर मरीज बनकर स्टेचर पर लेट जाता था जबकि दूसरा नली लगी हुई ग्लूकोज की बोतल को पकड़कर बैठ जाता था। आने-जाने के दौरान ये हमेशा एंबुलेंस के सायरन को बजाकर रखते थे। अवैध शराब वैन में मरीज के स्टेचर के नीचे छिपाकर रखी जाती थी।












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