25 करोड़ का खाली प्लाट देख कर टूट पड़े थे ठग

मामला प्राधिकरण के आवासीय विभाग का है। एक दिन पहले ही यहां पर सेक्टर-31 के दो मामलों में कार्यालय अधीक्षक और सहायक प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए निलंबित किया गया है। प्रहलाद नाम का व्यक्ति एक महिला और एक पुरुष के साथ आवासीय विभाग में महाप्रबंधक के कमरे में आया। महिला ने अपना नाम उमा शंकर पत्नी पांडुरंगा शंकर निवासी सेक्टर-15ए बताया। महिला ने भूखंड को अपना बताते हुए उस पर बकाए धनराशि की जानकारी मांगी और इसे ट्रांसफर में आने वाले खर्च को पूछा। जीएम एनपी गौतम को महिला पर शक हुआ और उन्होंने मूल आवंटी को भी कार्यालय में बुला लिया।
कुछ देर में भूखंड के मूल आवंटी पांडुरंगा शंकर सभी असली कागज लेकर पहुंच गए। सभी लोगों को आमने-सामने करवाया गया, तो पता चला कि महिला ने फर्जी आईडी कार्ड तैयार कर रखा है। साथ ही जो कागज दिखाए जा रहे हैं वह भी पूरी तरह से जाली हैं। इसके बाद एनपी गौतम ने प्राधिकरण के थाना प्रभारी अनिल समानिया को बुला लिया।
मौके पर पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो मामला खुल गया। अपना नाम उमा शंकर बताने वाली महिला का असली नाम प्रेम पत्नी रवि निवासी अशोक नगर, दिल्ली निकला। इनके साथ आए दोनों व्यक्ति प्रॉपर्टी दलाल हैं। इसमें प्रहलाद पुत्र छोटे सिंह निवासी मयूर विहार फेस-थ्री और दूसरा व्यक्ति सियाराम साही पुत्र रामपरीक्षत साही निवासी विजय पार्क, मौजपुरा शहादरा दिल्ली निकला। पूरा मामला खुलने के बाद थाना-20 को सूचना दी गई और मौके पर पुलिस ने महिला प्रेम, प्रहलाद और सियाराम को गिरफ्तार करके मामला दर्ज कर लिया है। फर्जीवाडे़ की लिखित शिकायत पांडुरंगा शंकर ने थाना सेक्टर-20 में की है। पुलिस अब इस गोरखधंधे से जुड़े दो जालसाज चिंटू व रणबीर गौतम की तलाश कर रही है। जो इस प्रकरण के मास्टर माइंड बताए जा रहे हैं।
उम्र के अंतिम पड़ाव में प्रेम कुमारी को दो लाख रुपये का लालच ले डूबा। प्रॉपर्टी डीलर चिंटू व रणबीर गौतम ने उसे प्राधिकरण के दफ्तर में जाकर कुछ कागज निकलवाने के लिए खड़े होने के एवज में दो लाख रुपये देने का वायदा किया था। वहीं, गिरफ्तार सियाराम को भी तीन लाख रुपये का लालच देकर प्रेम कुमारी का पति बनने के लिए तैयार किया गया था। लालच में फंसते ही प्रेम कुमारी को उमा शंकर नाम की महिला का फर्जी आईडी वोटर कार्ड दे दिया गया। महिला बड़े घर की लगे इसके लिए उसे नकली सोने के गहने भी पहना दिए गए थे। इसके बाद उसे सियाराम व प्रह्रलाद के साथ प्राधिकरण में जीएम के कमरे में भेज दिया गया।
फर्जीवाडे़ का खुलासा होने पर महिला की तलाशी केदौरान उसकेपास से आधा दर्जन से अधिक प्रापर्टी डीलरों केविजटिंग कार्ड बरामद हुए। सेक्टर-15 ए में कार्नर का प्लॉट 258 है। जिसका मूल आवंटी उमाशंकर दिल्ली में रहती है। इस प्लॉट पर नोएडा व दिल्ली के कई प्रापर्टी डीलरों की नजर थी। प्राधिकरण के आवासीय विभाग के कर्मचारियों के मुताबिक इस प्लॉट के बारे में एक माह केदौरान दो दर्जन से अधिक लोग विभाग में आकर पूछताछ कर चुके थे। जिसके कारण इस प्लॉट को लेकर विभाग केजीएम एनपी गौतम सतर्क हो गए थे।
उन्होंने मूल आवंटी से संपर्क किया तो पता चला कि वह अपना प्लॉट किसी को नहीं बेच रहे हैं। इस जानकारी के बाद उन्होंने लगातार कई दिनों से उनके दफ्तर में चक्कर लगा रहे लोगों को को बुलाया। काम होने की आस में जालसाज बुजुर्ग महिला को मूल आवंटी के रूप में अपने साथ ले गए लेकिन जीएम के कमरे में मूल आवंटी केपति पूरे दस्तावेज केसाथ मौजूद थे। कलई खुलते ही उनके पसीने छूट गए।
फर्जीवाड़े में किस कदर योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया इसकी आज झलक देखने को मिली। सेक्टर-15ए के प्लॉट 258 के लिए जो कागज प्राधिकरण में प्रस्तुत किए गए उन्हें पुराना करने के लिए फ्रीजर में रखकर पीला किया गया। स्टंप पर पूरी सूचनाएं लिखने के बाद इसे काफी ठंडे स्थान पर रख दिया जाए तो इसका रंग उड़ने लगाता है। ऐसे में अगर इसे अचानक देखा जाएं तो यह काफी पुराना कागज लगते हैं। ऐसा ही कुछ इस प्रकरण में भी देखने को मिला।












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