जानिए मेरठ का राजनैतिक इतिहास

Meerut
मेरठ। मां गंगा और हिंडन नदी के किनारे बसा मेरठ शहर यूपी के प्रमुख शहरों में से एक है । 7 विधानसभा क्षेत्रों वाले इस शहर को शिक्षा का केन्द्र भी माना जाता है। इन विधानसभा क्षेत्रों के नाम हैं मेरठ शहर, मेरठ कैंट, सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर, किठौर और खरखौदा। लेकिन परिसीमन के चलते खरखौदा विधानसभा को खत्म कर दिया गया है और हापुड़ और खरखौदा और शहर के कुछ हिस्से को काट कर मेरठ दक्षिण के नाम से एक नया विधानसभा क्षेत्र बनाया गया है।

जाति बाहुल्य वोट बैंकिंग रखने वाले इस शहर ने हमेशा चुनावों में बड़े उलट-फेर किये हैं। दलित और मुस्लिमों के भारी वोट के चलते यह शहर हमेशा से राजनेतिक पार्टियों के निशाने पर रहा है। पिछले चुनाव परिणामों पर नजर डाले तो इस शहर पर कब्जा उसी का हुआ जिसमे मुस्लिम और दलित वोटरों को अपना बनाया है। हमेशा से यहां भाजपा, सपा और बसपा कि लड़ाई रही है। इस चुनावी क्षेत्र में भाजपा को सिर्फ मेरठ कैंट की सीट पर सफलता मिली जबकि किठौर से समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार जीता था। बाकी पांच विधानसभा सीटों पर पहली बार बसपा के उम्मीदवार जीते।

मेरठ में कुल 19 लाख छह हजार 82 लाख मतदाता हैं, इनमें दस लाख 92 हजार 304 पुरूष मतदाता हैं जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 86 हजार 77 हजार 78 हैं। बेसिक जरूरतें तो हर शहर को चाहिए होती है लेकिन यहां की सबसे बड़ी समस्या यहां अपराध का अनुपात काफी बढ़ा हुआ है। मेडिकल कॉलेज, इंजीनियर कॉलेज और चौधरी चरण सिंह विवि होने के कारण यहां काफी बाहर से छात्र-छात्राएं आते हैं जो कि अपराधियों के हत्थे चढ़ते हैं। बसपा का वर्चस्व होने के बावजूद लोग यहां दहशत के साए में हैं।

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