ग्रुप-सी के कर्मचारी लोकपाल के दायरे से बाहर

इससे पूर्व बताया जा रहा था कि इस बैठक में प्रधानमंत्री को दायरे में रखने या नहीं रखने पर आखिरी फैसले के साथ बिल के मसौदे को अंतिम रूप दिया जा सकता है। लेकिन ऎसा कुछ नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि ड्राफ्ट रिपोर्ट में प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने पर फिलहाल चुप्पी है। हालांकि विदेशी चंदे पर चलने वाले एनजीओ, मीडिया और कॉरपोरेट जगत को लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही गई है।
इससे पहले केन्द्र की स्टैंडिग कमेटी की ओर से लोकपाल का जो मसौदा तैयार किया गया है उससे खुद अन्ना हजारे काफी नाराज है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने वादे से मुकर गयी है। अन्ना हजारे ने खुद सरकार के ऊपर वादाखिलाफी का आरोप लगाया था।
अन्ना ने कहा कि रामलीला मैदान में मनमोहन सिंह ने जो खत भेजा था उसके मुताबिक स्टैंडिंग कमेटी के सुझाव नहीं है, जो कि सरासर गलत है। पीएम साहब ने हमसे धोखा किया है। उस समय अनशन तोड़वाने के लिए उन्होंने हमारी सारी बातें मान ली थी और अब मुकर गये हैं।अन्ना ने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो वे मजबूत और प्रभावी लोकपाल के लिए एक बार फिर आंदोलन करेंगे। वैसे भी अन्ना ने 11 दिसंबर को जंतर मंतर पर एक दिन के अनशन का ऐलान कर दिया है।












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