जो करना है कर लो, एफडीआई से पीछे नहीं हटेगी सरकार

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नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र का पहला हफ्ता बुरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गया। वजह है सरकार का एफडीआई बिल, जिसे आम जनता से ज्यादा विपक्ष की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। पूरे एक हफ्ते से संसद ठप पड़ी हुई है। विपक्ष ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक एफडीआई बिल वापस नहीं होता तब तक वो संसद नहीं चलने देंगे। इसी बात पर सोमवार को कांग्रेस पार्टी की कोर ग्रुप की बैठक हुई जिसमें कैबिनेट के निर्णय से पीछे नहीं हटने का फैसला किया गया।

सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि जो कुछ भी विपक्ष कर रहा है वो नैतिकता के खिलाफ है। एफडीआई से किसी को नुकसान नहीं बल्कि फायदा ही होगा। विपक्ष जानबूझकर लोगों के दिलों में भ्रम पैदा कर रहा है। कांग्रेस पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि विपक्ष ने तो अपना नियम बना लिया है कि वो संसद आयेंगे ही हंगामा करने। आज एफडीआई को मु्द्दा बनाकर शोर मचा रहे हैं कल किसी और बात पर हंगामा करेंगे। उनकी मंशा ही नहीं कि वो काम करें।

गौरतलब है कि यूपीए कैबिनेट ने रीटेल सेक्टर के मल्टी ब्रांड में 51 फीदसी एफडीआई को मंजूरी दी थी। कैबिनेट ने सिंग्ल ब्रांड में एफडीआई की 51 प्रतिशत की सीमा को भी समाप्त कर दिया था। रीटेल सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के कैबिनेट के फैसले ने पूरे विपक्ष को एकजुट करने में मदद की है और बीजेपी सहित लेफ्ट पार्टियाँ भी सरकार के इस फैसले का विरोध कर रही हैं। और तो और यूपीए के घटकदलों ने भी इसका विरोध किया है।

कांग्रेस शासित प्रदेश केरल ने भी इस बात का विरोध किया है तो वहीं समर्थक डीएमके प्रमुख करूणानिधि ने भी इस बिल को गलत ठहराया है। बाकी गैरकांग्रेसी सरकार तो इस बात का खुलकर विरोध कर ही रहे हैं। जैसे की यूपी सीएम मायावती ने कहा है कि वो राज्य में एक भी रिटेल स्टोर नहीं खोलने देंगी तो वहीं गुजरात सीएम नरेन्द्र मोदी ने भी इस बात का विरोध किया है।

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