पैर में नस की बाईपास ग्राफटिंग से की हार्ट सर्जरी

डॉ. लोहचब ने जानकारी देते हुए बताया कि कुछ दिन पहले एक 25 वर्षीय युवक छाती में दर्द की शिकायत लेकर उनके पास आया था। डॉ. कुलदीप लालड़ द्वारा मरीज की एंजियोग्राफी की गई, जिसमें उसकी तीनों कोरोनरी आरट्री बंद पाई गई। जिसके कारण मरीज की बाईपास सर्जरी करने का फैसला लिया गया। इसके लिए पारंपरिक तरीके में तो मरीज के पैर पर लंबा चीरा लगाकर नस निकाली जाती और उसे उसके हृदय में लगा दिया जाता है।
लेकिन इस बार उन्होंने एंडोस्कोपिक तकनीक से मरीज के पैर में छोटा सा दो से.मी. से भी कम साईज का चीरा लगाकर वहां से नस निकालकर बाईपास ग्राफटिंग की गई। छोटा चीरा लगने से मरीज को दर्द तो कम हुआ ही,इसके साथ ही उसका घाव भी जल्दी भर गया।
उन्होंने बताया कि इस चीरे के कारण मरीज को आप्रेशन के पांच दिन बाद ही घर भेज दिया गया, जबकि अन्य मामलों में मरीज को दस दिन बाद घर भेजा जाता है। डॉ. लोहचब ने बताया कि एनस्थिसिया विभाग के डॉ. नवीन मल्होत्रा की टीम ने भी आप्रेशन के दौरान सहयोग दिया। उन्होंने बताया कि इस आप्रेशन के लिए मशीन एवं उपकरण कुछ दिन पहले ही संस्थान द्वारा खरीदे गए थे जिससे यह युवा मरीज लाभांन्वित हुआ।
भविष्य में भी मरीजों का ईलाज इस नई एंडोस्कोपिक तकनीक से किया जाएगा। जिससे मरीजों को दर्द कम होगा, चीरा छोटा लगाने के कारण संक्रमण का भी खतरा कम रहता है। कुलपति डॉ.एस.एस. सांगवान व पीजीआई निदेशक डॉ. चांद सिंह ढुल ने कहा कि डॉ. लोहचब व डॉ. मल्होत्रा की टीम निश्चित रुप से बधाई की पात्र है। यह तकनीक देश के चुनिंदा अस्पतालों मे ही उपलब्ध है। भविष्य में इस तकनीक से संस्थान में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी और मरीजों को दिल्ली व अन्य राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।












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