कमजोर रुपये से डूब रहा शेयर बाजार

Weak rupee's sinking stock market
दिल्ली( ब्यूरो)। शेयर बाजार से हमेशा वक्त से पहले चलता है। सारी दुनिया के बाजार के हालात खराब हैं। बाजार की बदहाली आज के हालात पर नहीं बल्कि आनेवाले वक्त को बता रहा है। सारी दुनिया के बाजार मान कर चल रहे हैं कि अगले कुछ सालों मे कंपनियों का मुनाफा नहीं बढ़नेवाला। बल्कि ज्यादातर का मुनाफा घटेगा। उसका हिसाब शुरू हो गया है। लेकिन भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कमजोर रुपया सबसे बड़ा कारण है। भारतीय कंपनियों या अर्थ व्यवस्था का हाल बुरा नहीं है।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी भी कह रहे थे कि रुपए की हालत विदेशी वजहों से बिगड़ी है और रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन शेयर बाजार को लगे तेज झटके से वे ऐसा सहम गए कि बाकायदा बयान जारी कर डाला कि, "रिजर्व बैंक रुपए की हालत पर बारीक निगाह रखे हुए हैं। मुझे यकीन है कि जो भी जरूरी होगा, रिजर्व बैंक करेगा।" यही नहीं, उन्होंने कहा कि डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी के पहले बाजार में अस्थिरता आती ही है। वित्त मंत्री कहते हैं भारत का आर्थिक विकास का आधार और मूलभूत पहलू मजबूत हैं और आज दुनिया की बदरंग होती सूरत के बीच भारत के ये पहलू और भी आकर्षक हो गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि विदेशी निवेशक अभी भी भातीय बाजार को नीचे हुए जाते हुए देख रहा है। हो सकता है यहां से बाजार ज्यादा न गिरे, 4200 निफ्टी की बात कही जा रही है। उसमें ज्यादा दम नहीं है । बाजार अधिकतम 20 फीसदी और नीचे जा सकता है।

वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) का निवेश अक्टूबर व नवंबर में धनात्मक रहा है। अक्टूबर में एफआईआई निवेश 63.40 करोड़ डॉलर और नवंबर में 22 तारीख तक 21.30 करोड़ डॉलर रहा है। ध्यान दें कि कल यही वित्त मंत्री जी कह रहे थे कि एफआईआई ने निवेश निकाला है, जिसके चलते रुपया इतना ज्यादा गिरा है। कल जब खबरें आईं कि अमेरिका में तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के दौरान आर्थिक विकास दर अपेक्षा से कम रही है और स्पेन में सरकारी बांडों के दाम घट गए हैं यानी यील्ड बढ़ गई है, तब भारतीय बाजार में घबराहट छा गई है। एफआईआई अपना निवेश खींचने लगे। फौरी आंकड़ों के मुताबिक शाम तक इक्विटी बाजार में उनकी शुद्ध बिकवाली 1186.42 करोड़ रुपए की रही है। आज गुरुवार को भी बाजार नया लो बनाता जा रहा है। रुपए में मची खलबली भी निवेशकों को पस्त किए हुए है।

एक ब्रोकर कहते हैं बाजार पूरी तरह कुछ निहित स्वार्थों के हाथों में सिमटा हुआ है इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता । यही लोग बाजार की दिशा तय करते हैं। यह भारत ही नहीं सारी दुनिया के बाजार को कंट्रोल करते हैं। जिसे हम विदेशी संस्थागत निवेशक कहते हैं। ये लोग तभी भारतीय बाजार में आएंगे जब शेयर उन्हें सस्ते मिलेंगे। ये लोग बस रुपये के अवमूल्यन पर नजर लगाए हुए हैं। जिस दिन रुपया गिरना बंद हुआ। कम से कम भारतीय बाजार में गिरावट तो बंद हो जाएगा। क्योंकि विदेशी निवेशको के ये शेयर बहुत कम भाव में मिलेंगे।

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