मनरेगा घोटालों की जांच में जयराम चाहते हैं कैग की मदद

राज्य स्तरीय निगरानी जांच को राज्य सरकार ने ठंडे बस्ते पर डाल रखा है। इससे ग्रामीण गरीबों की यह योजना भ्रष्टाचार व अनियमितता की भेंट चढ़ गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और झारखंड समेत 12 राज्यों में मनेरगा की कार्य प्रणाली और उसके अमल में हुई अनियमितता की जांच कैग करेगी। जांच एजेंसी पिछले पांच सालों का ब्योरा खंगालेंगी। इसके लिए रमेश ने कैग के ऑडिटर जनरल विनोद राय को विस्तृत पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने मनरेगा नियमावली का हवाला भी दिया है, जिसके आधार पर योजना के प्रावधानों पर अमल किया जाता है।
मनरेगा में सबसे ज्यादा घपला प्रशासनिक खर्च के नाम पर होने की शिकायतें हैं। मनरेगा के कुल बजट का छह फीसदी (2500 करोड़ रुपये) प्रशासनिक मद में खर्च किए जाने का नियम है। कई राज्यों में वैधानिक 100 दिनों से अधिक काम देकर भारी धन खर्च किया गया है। मजदूरी और सामग्री की खर्च के अनुपात में घालमेल की शिकायतें हैं। दिहाड़ी के भुगतान में निर्धारित मानक की अवहेलना हुई है।












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