विदेशी डिग्रीधारी भारतीय डॉक्टर भारत में कर सकेंगे प्रैक्टिस

2007 में आयोजित 5वें भारतीय अप्रवासी दिवस पर तत्कालीन प्रवासी मामलों के मंत्री वायलॉर रवि ने घोषणा की थी कि वर्र्षों से विदेशों में रहने वाले डॉक्टरों को अपने वतन की जनता का इलाज करने का मौका दिया जाएगा। ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया यानी ओआईसी कार्ड ऐसे लोगों को देकर सम्मान दिया जाएगा। यानी ऐसे लोगों के पास दो पासपोर्ट होंगे। एक भारत का और दूसरा जिस देश में रह रहे हैं वहां का। भारतीय मूल के विदेशों में रहने वाले डॉक्टरों को अभी भारत में इलाज करने की अनुमति नहीं है। ऐसे डॉक्टर सिर्फ सेमीनार, कार्यशाला और सीएमई में ही भाग ले सकते हैं। लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन डॉक्टरों को इंडियन मेडिकल काउंसिल कानून में संशोधन कर सेवा करने का अवसर देने का खाका तैयार किया है।
संशोधित कानून के प्रस्ताव के अनुसार जिन भारतीय के पास स्कूल से लेकर एमबीबीएस, एमएस की डिग्री विदेशों की होगी उन्हें भारत में प्रैक्टिस व मेडिकल कालेजों में पढ़ाने के लिए किसी भी तरह की परीक्षा में बैठने की जरूरत नहीं होगी। जो भारतीय सिर्फ मेडिकल की डिग्री विदेश से हासिल किए हैं उन्हें किसी भी प्रकार की रियायत नहीं होगी। ऐसे डिग्रीधारी को राष्ट्रीय परीक्षा परिषद की परीक्षा पास करनी ही होगी। कानून मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार कानून मंत्रालय ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है जल्द ही इसे केबिनेट में रखा जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि कैबिनेट में पास होते ही इसे संसद के मंगलवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में रखा जाएगा। अधिकारियों ने इस बारे में बताया कि भारतीय मूल के लगभग 60 हजार डॉक्टर अमेरिका में हैं जबकि 25 हजार डॉक्टर ब्रिटेन में। इसके अतिरिक्त लगभग 40 हजार डॉक्टर अन्य देशों में कार्यरत हैं।












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