ताज मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई यूपी सरकार को फटकार

1940 से लेकर 1994 तक किए गए सर्वेक्षणों में यह स्पष्ट हुआ है कि ताज की मीनारें, गुंबद सहित पूरा ढांचा सही है। गौरतलब है ताजमहल की नींव गलने लगी है। दैट्स हिंदी समेत कई साइटों और अखबारों में यह खबर छपी थी कि अगर जल्द ही कोई तरीका नहीं खोजा गया तो यह हैरतअंगेज इमारत दो से पांच साल के अंदर ध्वस्त हो जाएगी। यहां बता दें 358 साल पुराने इस मकबरे का निर्माण मेहोगनी लकड़ी के खंभे पर किया गया है। यह खंभे कुओं में बनाए गए हैं। इन कुओं में पानी यमुना नदी से आता है।
यमुना में पानी घटने के कारण इन कुओं में पानी नहीं पहुच रहा है। धीरे -धीरे ये कुएं सूखने लगे हैं और ताजमहल की नींव कमजोर पड़ने लगी है। यमुना से पानी नहीं मिलने के कारण नींव में बने लकड़ी के खंभे सड़ने लगे हैं। नींव कमजोर पड़ने के कारण मकबरे के हिस्सों में दरारें पड़ गईं हैं। मीनारें थोड़ी झुक गई हैं। यमुना नदी के किनारे लगे तमाम उद्योगों में नदी के पानी का इस्तेमाल होता है। प्रदूषण बढ़ गया है। सड़कों के नाम पर लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं। पेड़ों के कारण आंधी के दौरान ताजमल का धूल से बचाव होता रहा है। हर साल यमुना का पानी पांच फीट नीचे जा रहा है। इस वजह से पानी की जबरदस्त कमी होती जा रही है।
बेंच की ओर से नाराजगी व्यक्त किए जाने पर राज्य की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि ताजमहल के 500 मीटर के दायरे से बाहर ही राज्य सरकार कोई कदम उठा सकती है। इस पर बेंच ने अदालत में मौजूद मामले से संबंधित राज्य के मुख्य अभियंता से पूछा कि क्या ताजमहल की नींव को सुरक्षित रखने के लिए यमुना के जलस्तर को सही रखा जा सकता है। मुख्य अभियंता ने कहा कि नींव के लिए यमुना का जलस्तर समुद्रतल से 146 मीटर ऊपर होना चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में यह 142 मीटर है। इस पर बेंच ने पूछा कि चार मीटर से कितना प्रभाव पड़ेगा। हम इस पर विशेषज्ञों की सहायता ले सकते हैं। हालांकि बेंच ने सभी पक्षों के हलफनामों पर असंतुष्टि जताते हुए एएसआई और सीबीआरआई से रिपोर्ट तलब की है।












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