पेट्रोल का दाम घटाकर सरकार जनता को उल्लू बना रही है

क्योंकि देश के कई बड़े राज्यों में आने वाले दिनों में चुनाव होने वाले हैं। सरकार यह सब इसलिए कर रही है क्योंकि वह यह सब करके दिखाना चाहती है कि वह आम जनता के साथ है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक सरकार के इन हथकंड़ो को जनता भी भली-भांति समझती है इसलिए पेट्रोल के घटे दामों को लेकर जनता बहुत ज्यादा खुश नजर नहीं आ रही है।
गौरतलब है कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम 2.22 रुपये प्रति लीटर घटा दिए हैं। नई कीमतें मंगलवार आधी रात से लागू हो गई। मालूम हो कि 3 नवंबर 2011 को पेट्रोल की कीमत में 1.80 रुपए प्रति लीटर का इजाफा कर दिया गया था। अब तेल कंपनियों ने इंटरनेश्नल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद यह फैसला लिया। जून 2010 में तेल कीमतों को बाजार के हवाले करने के बाद से पहली बार पेट्रोल के दाम घटाए गए हैं।
लोकिन सोचने वाली बात यह है कि कल तक सरकार यह रोना रो रही थी कि उसके हाथ में पेट्रोल के दाम नहीं हैं क्योंकि अब यह अधिकार निजी कंपनियों के पास है फिर रातों-रात ऐसा क्या हो गया कि उसकी बात निजी कंपनियों ने मान ली।












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