हरियाणा में बंद होंगी डिस्टेंस एजुकेशन की दुकानें

यदि ऐसे सेंटर चल रहे हैं तो उन्हें तत्काल बंद कराया जाएगा। डीईसी ने यह संज्ञान 14 सितंबर तथा 8 नवंबर 2011 को एक प्रमुख समाचार पत्र के मुख्य पृष्ठ पर एमडीयू रोहतक की ओर से प्रकाशित उस विज्ञापन पर लिया है जिसमें प्रदेश भर में दूरस्थ शिक्षा के स्टडी सेंटरों पर प्रवेश की सूचना दी गई थी।
सिरसा निवासी प्रो. करतार सिंह ने डीईसी को एक पत्र भेजा था जिसमें उन्होंने 14 सिंतबर 2011 को एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित विज्ञापन की कटिंग भेजकर पूछा था कि अखबार में एमडीयू के नाम पर जो डिस्टेंस एजुकेशन के सेंटर दिखाए गए हैं, उन्हें मान्यता प्राप्त है या नहीं। इसके जवाब में डीईसी ने जो जानकारी उपलब्ध करवाई है, वह हैरान करने वाली है। डीईसी ने साफ शब्दों में लिखा है कि एमडीयू या अन्य कोई भी विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा के तहत अपना स्टडी सेंटर नहीं चला सकता। यदि प्रदेश में कहीं पर भी दूरस्थ शिक्षा के नाम पर कोई स्टडी सेंटर डिग्री, डिप्लोमा या परीक्षा करवा रहा है तो वह पूरी तरह से गैर कानूनी है। इसके लिए उन्होंने खासकर एमडीयू को एक पत्र भेजकर ऐसे सेंटरों को तुरंत बंद कराने के निर्देश दिए हैं।
करतार सिंह ने अब एक बार फिर से दूरस्थ शिक्षा परिषद को पत्र भेजा है जिसमें पूछा है कि एमडीयू की ओर से 14 सितंबर को अखबार में प्रकाशित सेंटरों को बंद कराने का निर्देश दिया था, मगर 8 नवंबर को फिर से उसी अखबार के मुख्य पृष्ठ पर एमडीयू की ओर से फिर से दूरस्थ शिक्षा के सेंटरों की लिस्ट प्रकाशित की गई है, तो डीईसी ने क्या एक्शन लिया है। करतार सिंह का कहना है कि दूरस्थ शिक्षा के नाम पर स्टडी सेंटर चलाकर कुछ लोग ठगी कर रहे हैं।
ऐसे सेंटरों पर डिग्री, डिप्लोमा खरीद रहे लोगों को इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए कि संबंधित स्टडी सेंटर को मान्यता प्राप्त है या नहीं। दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से डिग्री, डिप्लोमा कराने का सिलसिला सिरसा जिले में भी बड़े पैमाने पर चल रहा है। हैरानी की बात है कि दूरस्थ शिक्षा के स्टडी सेंटर उन गांवों में भी चल रहे हैं जहां मिडल तक का स्कूल नहीं है मगर वहां बीए, बीकॉम, बीएसी व पीएचडी तक की पढ़ाई कराई जा रही है। सभी सेंटरों पर कुछ लोग मोटी रकम देकर उक्त डिग्रियां खरीद रहे हैं।












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