युवाओं संग दीवाली मनायेंगे मुलायम

बात अगर आ ही गई है तो हम पहली ही लाइन में बता देते हैं कि मुलायम सिंह यादव अपनी दीवाली अपने युवा कार्यकर्ताओं के साथ मनायेंगे। हमेशा से युवाओं के बल पर आगे बढ़ने वाले मुलायम सिंह की नजरें इस बार भी यूपी विधानसभा की तरफ हैं। दीवाली के तुरंत बाद चुनावी बयार तेज हो जायेगी। इसलिए इस दीवाली मुलायम सिंह अपनी युवा ब्रिगेड में ऊर्जा भरने का काम करेंगे। वैसे उनके पुत्र अखिलेश यादव ने पहले ही मोर्चा संभाल रखा है। उन्हें देखते हुए लग रहा है कि चाहे धनतेरस आये या दीवाली, वो साइकिल से नहीं उतरेंगे.... हम यहां साइकिल यात्रा की बात कर रहे हैं।
वैसे इस दीवाली मुलायम को अमर सिंह की कमी जरूरत से ज्यादा खलेगी, क्योंकि चुनाव करीब हैं और उनके सबसे बड़े वजीर-ए-आला पार्टी रहे अमर पार्टी में नहीं हैं। जाहिर है कुछ फर्क जरूर दिखेगा। हालांकि फर्क दिखाई भी देने लगा है।
इन सबके बीच हमारी एक सलाह है कि बेहतर होगा अगर मुलायम सिंह व उनकी पूरी पार्टी उत्तर प्रदेश में जातिवाद की नारेबाजी बंद करें। हम उनको बताना चाहते हैं, कि अखिलेश यादव अपना क्रांतिरथ लेकर जहां-जहां गये, वहां-वहां उन्होंने जातिवाद की सीढ़ी पर चढ़कर भाषण दिये। मुस्लिम बहुल्य क्षेत्र में गये तो वहां मुसलमानों के साथ अन्याय की बात की, यादवों के मोहल्ले में गये तो यादवों की और ब्राह्मणों के घर में ब्राह्मणों से जुड़े मुद्दे उठाये।
अब यूपी की जनता इन सबसे ऊपर उठ चुकी है। हमारा सुझाव यह है कि दीवाली के दूसरे दिन जमघट बैठाने से अच्छा है अपनी पार्टी की विचारधारा में परिवर्तन करें। दूसरी सलाह यह है कि अगर उनकी पार्टी 2012 का चुनाव जीत जाये, तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर खुद बैठने के बजाये अखिलेश यादव को बिठायें।












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