तंत्र-मंत्र की दुकान के ग्राहक कहीं आप तो नहीं?

पशुबलि व जादू टोटकों के चलते कथित तांत्रिक संदेह के घेरे में आ गए हैं। केंद्र सरकार के औषधि एवं जादू टोना अधिनियम को ठेंगा दिखाकर समाचार-पत्रों में इश्तिहार, दीवारों पर लिखवाने के अलावा शहरों-कस्बों में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर तांत्रिक प्रशासन की नाक की नीचे से अपनी अंधविश्वास की दुकान चला रहे हैं।
रोजाना सैकड़ों लोग हो रहे हैं अंधविश्वास का शिकार
हरियाणा में रोजाना सैकड़ों लोग अंधविश्वास का शिकार होकर इन तांत्रिकों की चंगुल में फंस रहे हैं। कमीशन एजेंट किसी भी संकट से घिरे लोगों को ढूंढकर या फिर उन्हें हसीन सपने दिखाकर बलि का बकरा बनाने के लिए संबंधित तांत्रिक व साधू तक लाते है और इसके बाद उसका आर्थिक शोषण शुरू हो जाता है। ज्यादातर तांत्रिक स्वयं को महाकाली का पुराना उपासक, बंगाली काले, सिफली ईलम के विशेषज्ञ तथा तांत्रिक शक्तियों का बेताज बादशाह बताकर सभी माध्यमों से प्रचार करवाते है।
स्वयं को ईश्वर का रूप बताने वाले यह तांत्रिक थोड़ी सी धनराशि लेकर पहले किसी न किसी को जाल में फंसा लेते है और धीरे-धीरे आर्थिक शोषण में वृद्धि करते हुए उसे खौफ दिखाकर पशुबलि या नरबलि के लिए तैयार कर लते है, जोकि कानूनन एक दंडनीय अपराध है।
वैज्ञानिक नुस्खों का करते हैं इस्तेमाल
लोगों का शोषण करने के लिए तांत्रिक वैज्ञानिक नुस्खों की भी सहायता लेते है, जैसे नींबू से खून निकलना, पैसे का जलकर राख हो जाना, मोमबत्ती से दीये का जलना, दीये का अपने आप जलना इत्यादि रसायनिक क्रियाएं दिखाकर तांत्रिक शक्ति का दावा करते है। कुछ तांत्रिक ताबीज, धागा देकर, संकट हल होने का विश्वास दिलाकर मदिरा, पशुबलि इत्यादि को महाकाली के नाम पर मांग करते है, जबकि कई महिलाओं की विवश्ता का अनुचित लाभ उठाकर उनका शारीरिक शोषण करने से भी गुरेज नहीं करते। बांझ स्त्री को संतान प्राप्ति के चक्कर में उलझाकर उनसे दैहिक संबंध बनाने के अतिरिक्त कई तांत्रिक बच्चे की बलि इत्यादि दिलवा देते है। इस पर बांझ स्त्री मां बने या नहीं, मगर किसी मां की गोद जरूर सूनी हो जाती है।
एएससीआई ने रोक लगाने का दिया है सुझाव
तंत्र मंत्र, रक्षा कवच, ज्योतिष एवं जादू टोने से जुड़े विज्ञापनों पर भ्रम फैलाने और तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी देने से संबंधित शिकायतों पर भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाने का सुझाव दिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एएससीआई को पत्र लिखकर इस मामले में सुझाव देने को कहा था। एएससीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंत्रालय को भेजे जबाव में परिषद ने कहा कि ऐसे विज्ञापन जिनके माध्यम से अवैज्ञानिक, तकनीकी एवं तथ्यात्मक रूप से गलत तथा भ्रम फैलाने वाली जानकारी दी जाती है.. इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती है।
इस विषय में मंत्रालय ने हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय की टिप्पणी के आलोक में परिषद को पत्र लिखकर पूछा था कि क्या तंत्र मंत्र, ज्योतिष आदि से जुड़े विज्ञापनों को औषधि एवं जादू टोना निवारक आपत्तिजनक विज्ञापन कानून 1954 के दायरे में लाया जा सकता है। परिषद ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के सुझाव का समर्थन करती है।
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