गे-क्लब’ रैकेट पकड़ा गया, छात्रों को फंसाता था

पुलिस रैकेट से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी है। क्लब में शामिल होनेवालों से 500 रुपये लिए जाते थे। अमूमन कनाट प्लेस में ये मिलते हैं। हालांकि हालात के मुताबिक जगह बदलते रहते हैं। एसओ इंदिरापुरम सुनील कुमार ने बताया कि वैशाली इलाके से पिछले दिनों हाईस्कूल के दो छात्र रहस्यमय ढंग से लापता हो गए थे। परिजनों ने पुलिस को सूचना दी थी कि दिल्ली का रहने वाला एक शख्स छात्रों को अपने साथ ले गया है।
पुलिस की कई टीमें उनकी की तलाश में जुटी। इस बीच एक छात्र तो लौट आया, मगर दूसरा नहीं मिला। एसओ के मुताबिक, रविवार को दिल्ली से 'गे क्लब" का आजाद नामक एक सदस्य पकड़ा, जिसने पुलिस को बताया कि वैशाली से गायब हुआ छात्र कुछ दिन उसके साथ रहा। इसके बाद उसे पैसों का लालच देकर गे क्लब का एक दूसरा सदस्य उस छात्र को अपने साथ ले गया। फिलहाल छात्र उसी शख्स के साथ बताया जा रहा था।
देर रात छात्र के परिजनों ने पुलिस की मदद से उसे भी बरामद कर लिया। बकौल एसओ, लापता छात्रों में एक छात्र पहले भी इसी तरह से गायब हुआ था और कुछ दिन बाद लौट आया था। पकड़े गए सदस्य ने बताया है कि बरामद किया छात्र पिछली बार दो दिन उसके साथ रहा था और उसके साथ अप्राकृतिक सम्बंध भी बनाए थे। वैशाली चौकी इंचार्ज विन्ध्याचल तिवारी ने बताया कि गे क्लब के सदस्य ने बताया है कि वह वैशाली से ले जाए गए एक छात्र से शादी की साजिश में लगा था। छात्र को पता लगा तो उसने हंगामा खड़ा कर दिया। इससे साजिश पर पानी फिर गया।
बकौल एसओ, आजाद ने खुलासा किया कि रैकेट से जुड़े समलैंगिक बच्चों और किशोरों को बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसाते हैं। गे क्लब से जुड़े ऐसे लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सक्रिय हैं, जो इंटरनेट पर चैटिंग के जरिए भोले-भाले किशोर से दोस्ती का नाटक करते हैं, फिर उनसे मोबाइल नंबर हासिल कर बातचीत और मुलाकात शुरू कर देते हैं। क्लब के लोग किशोरों के दिमाग को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लेते हैं और उन्हें अहसास कराया जाता है कि यह जिंदगी जीने का नया तरीका है।
पकड़े गए आरोपी से पुलिस को यह भी पता लगा है कि दिल्ली के कनाट पैलेस इलाके में हर शनिवार को गे क्लब के सदस्य जुटते हैं, जहां एक गोपनीय जगह पर पार्टी का आयोजन करते हैं। पार्टी में शामिल होने के लिए एंट्री फीस 500 रुपये होती है। एसओ ने बताया कि इस क्लब में 300 से ज्यादा सदस्य हैं। एनजीओ की आड़ में एचआईवी पर शोध का दिखावा करने वाला दिल्ली का एक शख्स पार्टी का आयोजन कराता है। गे क्लब के पुराने सदस्य नए लोगों के साथ पहुंचते हैं और असामाजिक काम करते हैं।












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