फोरेंसिक लैब नहीं पहुंचे आगरा बम धमाके के सैम्पल

Agra bomb blast
लखनऊ। आगरा के चिकित्सालय में बम विस्फोट हुआ कई लोग घायल हुए बावजूद इसके लिए पुलिस प्रशासन की लापरवाही कम नहीं हुई। शनिवार को विस्फोट के साठ घंटों से भी अधिक का समय बीत जाने के बाद भी फॉरेन्सिक लैब में बम के टुकड़े नहीं भेजे गये। इसके लिए पुलिस भले ही अपने तर्क दे लेकिन लैब के डिप्टी डायरेक्टर डा. संतोष कुमार के अनुसार घटना स्थल से रूई में कुछ नमने लिए गये थे जिसके आधार पर कहा गया कि धमका देशी बम से किया गया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बम के टुकड़े लैब नहीं आए।

राज्य में बम विस्फोट होने के बाद हाई एलर्ट की घोषित कर दिया गया लेकिन पुलिस की उदासीनता दूर नहीं हुई। आगरा में धमाका होने के बाद आगरा की फॉरेन्सिक लैब में बम के टुकड़े नहीं भेजे गए ताकि इस बात की पुष्टि हो सकती कि आखिर बम में किस प्रकार के रसायन का प्रयोग किया। हालांकि डीजीपी व स्पेशल डीजी ने घटना स्थल का दौरा करने के बाद डीजी बृजलाल ने बयान जारी किया कि धमाके में देशी बम का विस्फोट प्रयोग किया गया।

यह बिल्कुल वैसा ही था जैसा दीपावली में बच्चों द्वारा पटाखा झुड़ाने में प्रयोग होता है। पुलिस के इस बयान के विपरीत सूत्रों का कहना है कि बम में नाइट्रेट के भी कुछ अंश है लेकिन पुलिस इसे छिपाने का प्रयास कर रही है। यदि ऐसा न होता तो पुलिस धमाके की सूचना देने वाले का एक लाख का इनाम दिए जाने की घोषणा करती। केवर कॉटल स्वॉब की जांच कर यह घोषणा कर देना कि बम देशी था उचित नहीं है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि बम धमाके में मिले सबूतों व टुकड़ों का कई प्रकार से परीक्षण किया जाता है लेकिन अभी तक इस मामले ऐसा नहीं किया गया। फोरेंसिक लैब के अधिकारियों ने भी यह कहा कि उन्हें अभी तक बम के टुकड़ों के नमूने नहीं मिले यदि मिले होते तो जांच आगे बढ़ सकती थी। पुलिस का कहना है कि अधिकांश सबूत एटीएस व एसटीएफ वाले अपने साथ ले गए जिस कारण टुकड़े लैब नहीं भेजे जा सके।

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