आय से अधिक संपत्ति मामले में कोर्ट में पेश होंगी जयललिता

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी की पीठ ने जयललिता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि लोअर कोर्ट के जज सुनिश्चित करेंगे कि जयललिता से पूछताछ उचित वातावरण में हो। जयललिता ने सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों पर वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे के माध्यम से सहमति जताई थी कि वह खुद को कर्नाटक में निचली अदालत के जज के समक्ष पेश करेंगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जारी किया।
जयललिता ने पहले सुरक्षा के आधार पर सीआरपीसी की धारा-313 के तहत पेशी में छूट मांगी थी, जिसे खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 5 सितंबर को कहा था कि वह कार्यवाही में विलंब का प्रयास कर रहीं हैं। जयललिता के वकील साल्वे ने कहा था कि लोअर कोर्ट ने गलत तरह से पेशी से छूट की अर्जी खारिज की, जबकि धारा-313 (5) किसी आरोपी को लिखित में सवालों के जवाब देने की आजादी देती है। पीठ साल्वे की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई और उनकी मांग को खारिज कर दिया। जया के खिलाफ 1991 से 1996 के बीच 66 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति जुटाने का आरोप हैं।
वहीं सीबीआई ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया जिसमें उसने दलील दी कि आयकर न्यायाधिकरण के निष्कर्ष के आधार पर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला बंद नहीं हो सकता। मायावती ने याचिका दायर कर अपने खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला समाप्त करने का अनुरोध किया है। यह याचिका 2008 से लंबित है। हाल ही में उन्होंने एक नया हलफनामा दाखिल किया था जिसमें आयकर आयुक्त के 27 मई, 30 मई एवं 31 मई के आदेश को आधार बनाया गया है जिसमें उन्हें अभियोजन से छूट दी गई है। सीबीआई ने इसी हलफनामे का जवाब दाखिल किया है। इस मामले पर आज भी सुनवाई होगी।












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