किसानों को कम, बिल्डरों को ज्यादा राहत देगा भूमि अधिग्रहण विधेयक

ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने पूर्व के मसौदे में कुछ बदलाव करते हुए भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन विधेयक, 2011 के नाम से विधेयक लोकसभा में पेश किया। मसौदे में प्रभावित परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और संस्कृति संबंधी विपरीत प्रभावों का पारदर्शी तरीके से आकलन किए जाने की वकालत की गई है। साथ ही विभिन्न पक्षकारों के साथ विचार-विमर्श और कानूनी बारीकियों का अध्ययन कर तैयार किए गए विधेयक में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि बहु फसलीय सिंचित भूमि को अंतिम उपाय के तौर पर ही अधिग्रहित किया जाए।
यानी सरकार ने बहु फसलीय सिंचित भूमि को भी अधिग्रहीत करने के लिए रास्ता बना दिया है। विधेयक में यह प्रस्ताव भी किया गया है कि यदि बहुफसलीय भूमि का अधिग्रहित किया जाता है तो उतनी ही समान मात्रा में बंजर भूमि को विकसित किया जाना चाहिए। विधेयक में पुनर्वास तथा पुन: बसाहट प्रावधान केवल तभी लागू होंगे जब निजी कंपनियां ग्रामीण इलाकों में सौ एकड़ से अधिक या शहरी इलाकों में 50 एकड़ से अधिक भूमि किसी परियोजना के लिए खरीदेंगी।
विल में सार्वजनिक उद्देश्य को व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है ताकि अधिग्रहण में सरकार का हस्तक्षेप रक्षा और केवल कुछ विकास परियोजनाओं तक ही सीमित रहे। विधेयक में भूमि तभी अधिग्रहीत की जा सकेगी जब इसपर 80 फीसदी परिवारों की सहमति हो। विधेयक में यह भी प्रस्ताव किया गया है कि राज्यों में एक भूमि बैंक स्थापित किया जाए और यदि संबंधित पार्टी दस साल में अधिग्रहित भूमि का उपयोग नहीं करती है तो संबंधित भूमि इस बैंक के पास रहे।












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