नागरिक अशांति पर एनआईसी करेगी चर्चा

NIC to discuss tackling of civil disturbances, radicalization
नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अन्ना के अनशन के डर से केंद्र सरकार अभी तक उभर नहीं पाई है। इसलिए नागरिक अशांति को लेकर 10 सितंबर को राष्ट्रीय एकता परिषद (एनआईसी) की बैठक करने जा रही है जिसमें इस बात पर चर्चा की जाएगी कि पुलिस और राज्य किस प्रकार नागरिक अशांति की स्थिति से अपने को बचा सकें। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह करेंगे। परिषद की बैठक में धर्म और जाति के नाम पर युवकों में चरमपंथ पर काबू पाने के बारे में भी विचार विमर्श किया जाएगा।

आपको बता दें कि एनआईसी में कुछ 147 सदस्य हैं जिसमें वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के अलावा संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, छह राष्ट्रीय दलों के नेता, वरिष्ठ पत्रकार और उद्योग जगत के लोग शामिल हैं। इस बैठक में पत्रकारीय जगत की भी कई हस्तियां शिरकत करेंगी जिसमें शेखर गुप्ता (इंडियन एक्सप्रेस), एन रवि (हिंदु), मैमन मैथ्यू (मलयालम मनोरमा), शोभना भारतीय (हिंदुस्तान टाइम्स), टीएन नेनन (बिजनेस स्टैंडर्ड), राजदीप सरदेसाई (सीएनएन-आईबीएन), बरखा दत्त (एनडीटीवी) और एमके राजदान (पीटीआई) शामिल हैं।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय एकता परिषद का गठन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था और इसकी पहली बैठक 1962 में हुई थी। 10 सितंबर को होने वाली बैठक करीब तीन साल के अंतराल के बाद हो रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय इसका आयोजन कर रहा है। पी. चिदंबरम के गृह मंत्री बनने के बाद यह पहली बैठक हो रही है। चिदंबरम ने बैठक को लेकर आशा जतायी औऱ कहा कि दरअसल देश के भीतर एक दुश्मन नहीं है, हमारे भीतर कई दुश्मन हैं जिनसे लड़ना है। उसमें से ही एक नागरिक अशांति भी है। हम सुरक्षा तंत्र को चाक चौबंद करना चाहते हैं इसलिए हमें सबपर निगाह रखनी होगी। इसके लिए कभी कड़ाई से तो कभी प्रेम से कार्रवाई करनी होगी।

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