लिखित इस्तीफे के बाद जस्टिस सेन के महाभियोग पर संशय

संविधान के तहत जस्टिस द्वारा राष्ट्रपति को सौंपा जाने वाला इस्तीफा खुद लिखा हुआ होना चाहिए और उस पर उसके हस्ताक्षर भी होने चाहिए। अब इस बात पर संशय बरकरार हो गया है कि दोबारा इस्तीफा दिए जाने के बाद उन पर महाभियोग चलाया जाए या नहीं। राज्यसभा में पहले ही उन पर महाभियोग चलाने को मंजूरी मिल चुकी है। अब यह लोकसभा में पहुंच गया है।
इस बार जस्टिस सेन ने संविधान के अनूरूप अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया है। अब इस बात की उम्मीद बहुत कम है कि उनके खिलाफ महाभियोग का मामला अब आगे चलाया जाए। दो बार पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं जब महाभियोग से बचने के लिए जस्टिस के पद से किसी ने अपना इस्तीफा दे दिया हो।












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