हर जुंबा पर एक ही आवाज "मैं अन्ना हूं"
दिल्ली। हाथ में तिरंगा, जुबां पर अन्ना और मन में भ्रष्टाचार से लड़ने की तमन्ना लिये हजारों लोगों की टोली अन्ना के अनशन के दूसरे दिन भी हजारों की संख्या में दिल्ली की सड़कों पर नजर आये। अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों को हिरासत में लिये जाने के बाद भी समर्थकों में उत्साह व जोश की कोई कमी नहीं दिख रही थी। कांग्रेस को पहले यह लगा कि अगर अन्ना को गिरफ्तार कर लिया जाये तो शायद यह आग ठंडी पड़ जाये मगर इस सोच और घटना ने आग में घी डालने का काम कर दिया।
अन्ना के समर्थक सीधे पुलिस से पूछ रहे थे कि मैं हूं अन्ना... मै हूं अन्ना...। कितनों को और किस-किस को गिरफ्तार करेंगे आप यहां तो सभी अन्ना हैं। पुलिस से लोगों का सवाल यह था कि आखिर में कौन से गलती की है अन्ना ने कि उन्हें गिरफ्तार किया गया। मन में मायूसी और आंखों में आक्रोश लिये लोग सड़कों पर जाने वाले लोगों से पूछ रहे थे कि क्या आप सच में भ्रष्टाचार से पीडि़त नहीं हैं।
मामला कुछ भी हो मगर मकसद सिर्फ एक था और वह था भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों को एक जुट करना। एक सुर में लोग जनलोकपाल बिल का समर्थन करते हुए कह रहे थे कि सरकार ने अन्ना के खिलाफ जो कार्य किया है उसे कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। बात अगर छत्रसाल स्टेडियम की करें तो वहां का नजारा ही कुछ और था।
स्टेडियम भर जाने के बाद लोग बाहर गिरफ्तारी देने को तैयार थे। यह तो थी मंगलवार की बात पर आपको बता दें कि आज भी हजारों की संख्या में लोग तिहाड़ जेल के बाहर एकत्र है और अन्ना के समर्थन में जी जान से लगे हुए हैं। समर्थकों का कहना है कि बात छिड़ी है तो अब आगे तक जायेगी और अब लोकपाल बिल पारित होने के बाद ही वह शांत होंगे।












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