सावन विशेष : खूबसूरत परिधान बिना श्रृंगार अधूरा
दोस्तों,हम लगातार आपको महिलाओं के सोलह श्रृंगार के बारे में बता रहे हैं । जानी मानी पत्रिका 'एराउंड द इंडिया' के मई अंक में छपे लेख सोलह 'श्रृंगार की महत्ता' की लेखिका 'कुमद मेहरोत्रा' ने इस विषय पर गहन अध्ययन किया है, जिसके बाद उन्होंने अपनी लेखनी से श्रृंगार का महत्व समझाया है।
कल हमने आपको श्रृंगार नंबर 15 यानी 'बिछिया' के बारे में तो आज हम आपको बताते हैं श्रृंगार नंबर 16 के बारे में। जिसे हम परिधान कहते हैं। शारीरिक आकार प्रकार के अनुसार परिधान में रंगो का चयन स्त्री के तंत्रिका तंत्र को मजबूत और व्यवस्थित करता है। इसलिए परिधान चयन में पसंद ना पसंद का विचार जरूर होना चाहिए।
हमने देखा कि श्रृंगार का मतलब केलव सजावट नहीं होता ये सोच, कर्म, भावना, विचार को भी प्रभावित करता है। क्योंकि स्त्री एक जीवन को जन्म देती है इसलिए जब तक स्त्री ही संतुलित नहीं होगी तो वो परिवार को कैसे खुशहाल रखेगी। इसलिए नारी का सजना-संवरना काफी जरूरी है।













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