महिला को टाको सूबो सिंड्रोम से मिली आजादी

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. प्रणव कुमार ने बताया कि ओमवती का ईसीजी, ईकोकार्डियोग्राम और छाती के एक्सरे के साथ साथ कार्डियेक एंजाइम भी हार्ट अटैक की आशंक दिखा रहा था, लेकिन ओमवती हार्ट अटैक का शिकार नहीं थी। दरअसल वह टाको सूबो सिंड्रोम का शिकार थी। यह बीमारी दुर्लभ से दुर्लभ श्रेणी में आती है और सबअर्चनाइज्ड हेमरेज से होती है। चूंकि इस बीमारी का पता जापान के डॉक्टर टाको सूबो ने लगाया इसलिए इसे उन्हीं का नाम दिया गया।
मस्तिष्क के अंदर दो स्तरों पर पानी भरने से यह स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि ओमवती के ब्रेन के पास की धमनियों में फुलाव आ गया था जिसे चिकित्सीय भाषा में एनुरीज्म कहा जाता है और रक्त के अत्यधिक दबाव पर यह फट गया। एनुरीज्म के फटने से सिर में तेज दर्द, सिर में भारीपन, उल्टी, स्वेटिंग और सांस लेने में परेशानी होने लगी। ओमवती का रक्त चाप काफी कम था और फेफड़े में पानी भर रहा था। हार्ट मात्र 20 फीसदी ही काम कर रहा था। डॉ.प्रणव ने कहा कि एनुरीज्म को निकालने के लिए ब्रेन की छह घंटे लंबी माइक्रोसर्जरी की गई। जिसमें दो मिलीमीटर के औजार से एनुरीज्म को निकाला गया।
नौ मिलीमीटर के एनुरीज्म को निकालना जोखिम भरा था क्योंकि धमनियों के पास ही ब्रेन था। ब्रेन के इस हिस्से में पतली पतली काफी धमनियां होती है जो बे्रन के प्रमुख हिस्से में रक्त पहुंचाती है। इन धमनियों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है। हटाए गए एनुरीज्म की जगह टाइटिनियम से बनी क्लिप लगाई गई। यह क्लिप जिंदगीभर रहेगी। डॉ. प्रणव ने कहा कि जन्म के समय बेहद कमजोर होने, कालेस्ट्रॉल बढ़ने, उच्च रक्त और हार्ट के वाल्व के कमजोर होने के कारण टाको सूबो सिंड्रोम होता है।












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