अब सर उठाकर जी सकेंगी सैक्स वर्कर

Rehabilitation policy for Sex Workers
अंबाला। अब हरियाणा राज्य में सेक्स वर्कर भी सर उठाकर जी सकेंगी। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद ऐसा होगा। आदेशों अनुपालना करते हुए अंबाला के जिला प्रशासन द्वारा जिले में पंजीकृत 823 महिला सैक्स वर्कर के पुर्नवास हेतू हर सम्भव उपाय किये जा रहे हैं।

ऐसी महिलाओं के पुर्नवास के लिए उन्हेंं स्वरोजगार योजनाओं के अंतर्गत कम ब्याज पर ऋण, सब्सिडी प्रदान की जायेगी। इसके इलावा महिला कल्याण निगम व अन्य संस्थाओं के माध्यम से ऐसी महिलाओं को व्यवसायिक व तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करके स्वावलंबी बनाया जायेगा। इन महिलाओं द्वारा बनाये गये उत्पादों को बाजार में अच्छी कीमत पर बिकवाने के लिए सहयोग भी किया जायेगा तथा अन्य सरकारी विभाग भी इस कार्य में पूर्ण सहयोग देंगे।

सरकार की मुख्य सचिव उर्वशी गुलाटी द्वारा जारी निर्देशानुसार सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक फौजदारी अपील नंबर 135 वर्ष 2010 बुद्धदेव कर्म साकर बनाम पश्चिम बंगाल सरकार मामले में केन्द्र तथा राज्य सरकारों को हिदायतें जारी की है कि पूरे देश में समाज कल्याण बोर्ड के माध्यम से ऐसी महिलाओं के पूर्नवास हेतू योजनाएं बनाए जिनका शारीरिक तथा सैक्सुअली रूप से शोषण होता रहता है और इसे वैश्या के नाम से जाना जाता है। अपने आदेशों में कोर्ट न्यायालयों ने कहा है कि सैक्स वर्कर भी अन्य लोगों की तरह मानव प्राणी है तथा किसी भी व्यक्ति को यह अधिकार नहीं कि उनका उत्पीडऩ अथवा हत्या करे।

सुख के लिए वेश्या नहीं बनती महिला -सुप्रीम कोर्ट

न्यायालय द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि कोई भी महिला अपनी सुख के लिए वेश्या नहीं बनती लेकिन गरीबी एवं हालात के कारण उसे ऐसा बना दिया जाता है। समाज के लोगों को ऐसी सताई हुई सैक्स वर्कर को हीन भावना से देखने की बजाए उनके प्रति सहानुभूति जतानी चाहिए। सविधान की धारा 21 के अंतर्गत ऐसे लोगों को भी इज्जत के साथ रहने का अधिकार है।

न्यायालय द्वारा केन्द्र तथा राज्य सरकारों को यह सुनिश्चत करने को कहा गया है कि ऐसी महिलाओं को तकनीकी, व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान करवाने के साथ-साथ रोजगार दिलवाकर स्वावंलबी बनाया जाये। सरकारें इसके साथ-साथ ऐसी महिलाओं द्वारा बनाये गये उत्पादों को बिकवाने में भी सक्रिय सहयोग करें।

तीन प्रकार की होती हैं सैक्स वर्कर

हरियाणा में सैक्स वर्कर के पूर्नवास में स्वधार योजना के अंतर्गत सिविल सोसाईटी द्वारा जांच के दौरान पाया गया है कि कुल तीन प्रकार की सैक्स वर्कर हैं, जिनमें से ट्रक चालाकों के साथ सैक्स करने वाली फ्लांईग सैक्स वर्कर, ढाबों पर सैक्स करने वाली वर्कर जोकि मोबाईल फोन पर उपलब्ध रहती हैं तथा कोठों पर कार्य करने वाली सैक्स वर्कर।

इनमें से अधिकांश लड़कियां समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा उड़ीसा, आसाम, बिहार जैसे दूसरे राज्यों से हैं। स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के मुताबिक पूरे देश में 14440 सैक्स वर्कर कार्य कर रही हैं। उन्होंने जिले की समाजसेवी संस्थाओं तथा आम जनता से ऐसी महिलाओं के पूर्नवास में सक्रिय सहयोग देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हम सब की यह नैतिक जिम्मेवारी है कि किन्ही भी कारणों से जो महिलाएं भटक चुकी हैं उन्हें स्वावलंबी बनाकर मुख्य धारा में शामिल करें।

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