बाबा रामदेव के बचाव में उतरे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री

करीब छह करोड़ रूपये की लागत से यहां बने उत्तराखण्ड भवन का लोकार्पण करने के बाद श्री निशंक ने कहा कि स्वामी रामदेव और उनके सहयोगी बालकृष्ण पर कार्रवाई कर केन्द्र सरकार भ्रष्टाचार और कालेधन के मामले को दबाना चाहती है। उन्होंने कहा कि अब इस मामले में जनता ही तय करेगी कि सही और गलत क्या है। वहीं रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण के मामले में चल रही जांच के बारे में उन्होंने कहा कि बालकृष्ण हों या कोई और यदि वह दोषी है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि आखिर सरकार ने बालकृष्ण के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान की घटना के पहले क्यों नहीं कार्रवाई नहीं की। केन्द्र सरकार का विरोध करने के बाद ही उन पर कानूनी शिकंजा क्यों कसा गया।
लोकपाल बिल के बारे में उन्होंने कहा कि लोकपाल कानून में उच्च पदों पर आसीन लोगों की जि मेदारी तय होनी चाहिए। इन्हें भी लोकपाल बिल के दायरेमें लाना चाहिए। वहीं उत्तराखंड में आमरण अनशन की वजह से अपना जीवन गंवाने वाले स्वामी निगमानन्द के मामले में उन्होंने मीडिया को ही दोषी करार दिया। उन्होंने कहा कि निगमानन्द ने अदालत के एक स्थगनादेश के खिलाफ आमरण अनशन किया था। श्री निशंक ने कहा कि निगमानंद की मांग अवैध खनन को रोकना नहीं था बल्कि उन्होंने कुंभ क्षेत्र के विस्तार की मांग उठायी थी। उत्तराखण्ड की सरकार ने उनकी मांग मान ली थी जिस पर न्यायालय ने स्थगनादेश दे दिया था और इसी के खिलाफ वह अनशन पर थे।
उत्तराखंड के विकास पर चर्चा करते हुए श्री निशंक ने कहा कि उत्तराखण्ड विजन 2020 को लेकर आगे बढ़ रहा है। विजन 2020 के तहत शिक्षा, आयुर्वेद व पर्यटन जैसे क्षेत्रों में ऐतिहासिक काम किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने गरीबों के लिए कई योजनाएं चलायी हैं। गरीबों को दो रपये प्रति किलो गेहूं और तीन रपये प्रति किलो चावल दिया जा रहा है। गरीबों के बच्चे इंजीनियरिंग कक्षाओं में मुफ्त शिक्षा ले रहे हैं जबकि सभी वर्ग के बच्चों की मात्र 15 हजार रूपयों में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी हो जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखण्ड के तकरीबन हर घर से एक नौजवान सेना में है।












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