हरियाणा सरकार ने भूमि अधिग्रहण कमेटी का किया गठन

इसके ठीक एक वर्ष बाद भूमि अधिगृहित करने का फाइनल नोटिस जारी कर दिया गया। याचिका में मांग की गई कि अधिसूचना को खारिज किया जाए। भूमि अधिग्रहण के समय सरकार ने अपनी तीस सितंबर 2007 व 26 अक्टूबर 2007 की उन पॉलिसी की अनदेखी की जिसमें कहा गया था कि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना से पहले के निर्माणाधीन मकानों को अधिग्रहण प्रक्रिया से छूट दी जाएगी। कहा गया कि सरकार प्राइवेट बिल्डर्स को भी लाभ पहुंचा रही है। कई प्रभावशाली लोगों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से बाहर रखी गई।
इनमें मैसर्स बज्ज होटल्स प्राइवेट लिमिटेड, हाई एनर्जी रिटेलर प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स गोल्डन व्यू बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स बेस एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स बीटीवीएस बिल्ड वेल प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स एडसन सोफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड व मैसर्स रियलेटर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। याचिका में कहा गया कि भूमि अधिग्रहण के नाम पर सरकार प्राइवेट बिल्डर्स को ग्रुप हाउसिंग सोसायटी बनाने का लाइसेंस दे रही है। अधिग्रहण की जा रही भूमि का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही बिल्डर्स ने खरीद लिया है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण के सरकार के फैसले को खारिज किया जाए।












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