अब चिदंबरम की होगी जेपीसी के सामने पेशी

JPC to questions P Chidambram
दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा के बयानों से लपेटे में आए पूर्व वित्तमंत्री और वर्तमान केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम को भी जेपीसी पूछताछ के लिए बुलाएगी। सूत्रों ने बताया कि 2जी स्पेक्ट्रम विवाद में फंसे चिदंबरम से समिति में पूछताछ के लिए दबाव है इसलिए इस विवाद में उनसे जल्द ही पूछताछ हो सकती है। जेपीसी के अध्यक्ष पीसी चाको ने भी माना कि समिति में चिदंबरम से पूछताछ की मांग उठी है। अब हमलोग विचार कर रहे है कि इस विवाद में कौन कौन से पूर्व वित्त मंत्रियों को बुलाया जाए।

वैसे स्पेक्ट्रम आवंटन में कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले लोगों की सूची लंबी है। एक तरफ जहां सरकार ने उस वक्त दूरसंचार कंपनियों की कथित खराब स्थिति पर कोई ठोस अध्ययन किए बिना ही पैकेज का विचार कर लिया। वहीं कई सांसद भी दूरसंचार कंपनियों को रियायत दिलाने की कवायद में जुटे थे। वर्ष 1998 में विभिन्न दलों के 50 सांसदों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कंपनियों के लिए रियायत का आग्रह किया था। आपको बता दें कि ए. राजा ने कोर्ट में पीएम के साथ-साथ तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम को भी लपेट लिया था। बैठक में पूर्व सचिव एवी गोकक की गवाही हुई जिसमें कई राजनीतिज्ञों के नाम सामने आए। गोकक 1996-98 के बीच दूरसंचार सचिव रहे। गोकक ने बुधवार को कहा कि

गौरतलब है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री आईके गुजराल के निर्णय को खारिज करते हुए उन्होंने दूरसंचार उद्योग के बाबत अध्ययन का जिम्मा औपचारिक रूप से ब्यूरो आफ इंडस्टि्रयल कॉस्ट एंड प्राइसेज को दिया था, लेकिन कार्रवाई आईसीआईसीआई की रिपोर्ट पर हुई। यह और बात है कि दूरसंचार मंत्रालय की फाइलों में कहीं भी आईसीआईसीआई का जिक्र नहीं है। इस अध्ययन के लिए उसे कोई पारिश्रमिक भी नहीं दिया गया। फिर भी उसने रिपोर्ट दी और उसी के आधार पर कंपनियों के लाइसेंस की अवधि 10 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी गई। बहरहाल इस सबके लिए जिम्मेदार गोकक ने इसे उस समय की जरूरत बताया। जेपीसी की अगली बैठक अगस्त के पहले सप्ताह मे होगी जिसमें अनिल कुमार से पूछताछ होगी।

उधर, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में प्रधानमंत्री एवं अटार्नी जनरल को लपेट लिया। पटियाला हाउस कोर्ट में बेहुरा ने बताया कि राजा ने पहले आओ पहले पाओ के तहत आवेदन स्वीकार करने की अंतिम तिथि में बदलाव के बारे में प्रधानमंत्री को सूचित कर दिया था। साथ ही यह भी बता दिया था कि तत्कालीन सॉलिसीटर जनरल जीई वाहनवती से अनुमति ले ली गई है। लिहाजा उन्हें आरोप मुक्त किया जाए। बेहुरा ने कहा कि लोक सेवक के नाते उन्हें ऐसी नीति को लागू करने के लिए आरोपी नहीं बनाया जा सकता, जिसे मंत्री ने सॉलिसीटर जनरल की अनुमति लेने के बाद तैयार किया था। आपको बता दें कि बुधवार को बेहुरा ने रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव को इस मामले में घसीटते हुए कहा था कि लाइसेंस फीस न बढ़ाने का निर्णय तत्कालीन वित्त सचिव डी सुब्बाराव का ही था।

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