सरकार ने दी गोरखालैंड प्रशासन को मंजूरी

लेफ्ट ने खुद को इस समझौते से अलग रखा है। उसका कहना है कि इस समझौते से राज्य में हिंसा बढ़ेगी और साथ ही अलग गोरखालैंड राज्य बनाने की लोगों की मांग को बल मिलेगा। इसके अलावा कई वर्गो ने प्रस्तावित पर्वतीय प्राधिकरण का नाम 'गोरखालैंड" रखे जाने को लेकर आपत्ति जताई है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले पर कहा था कि केवल नाम बदलने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। नाम को लेकर राजनीति बंद होनी चाहिए।
लेफ्ट ने इस समझौते के विरोध में उत्तरी बंगाल में बंद का एलान किया है। इसके लिए सोमवार को दुकाने बंद रखी गई और सड़कों पर सन्नाटा पहरा रहा। राज्य के कई इलाकों में बंद का बुरा असर देखने को मिला। लेफ्ट सदस्य प्रकाश करात का कहना है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करके बहुत बड़ी भूल की है। अब अलग गोरखालैंड की मांग फिर से उठेगी।












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