दिल्ली में किडनी दिलाने के नाम पर ठगी

व्यवसायी ने बताया कि वह किडनी की बीमारी से ग्रस्त है। अस्पताल में किडनी की डायलसिस हो रही है। इसी दौरान अस्पताल में उसकी मुलाकात पवन से हुई। पवन ने बताया कि वह उसका किडनी ट्रांसप्लांट करवा सकता है। वह डोनर की व्यवस्था कर सकता है। इन सब में करीब दस लाख खर्च आएगा। उसके बाद पवन व्यवसायी से चार लाख रुपये लेकर फरार हो गया। एक सूचना पर पुलिस ने उक्त स्थान से पवन को दबोच लिया।
पवन ने बताया कि वह जुआ और शराब का शौकीन है। उसने वर्ष 2002 में एक व्यवसायी को अपनी किडनी दान की थी। इसके बाद किडनी रैकेट में बिचौलिया का काम करने लगा। और उन लोगों को डोनर मुहैया करवाने लगा जिन्हें किडनी की जरूरत होती थी। 2004 में उसे नई दिल्ली जिला पुलिस ने किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के मामले में गिरफ्तार कर लिया। जेल से निकलने के बाद वह मजनूं का टीला निवासी जॉन के साथ मिलकर लोगों को डोनर देने का आश्वासन देकर ठगी करने का धंधा शुरू कर दिया।












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