हरियाणवी खिलाड़ियों को रास नहीं आ रही पुलिस की नौकरी

कॉमनवेल्थ गेम्स में दो मेडल जीत चुकी शूटर अनीसा ने रेलवे विभाग की टीसी की नौकरी इस उम्मीद में छोड़ी थी की उन्हें प्रदेश में मना माफिक पद मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रदेश सरकार ने उन्हें सब इंस्पेक्टर बनाया जिसपर उन्होंने नाखुशी जाहिर की। खिलाड़ी अनीसा का कहना है कि इससे बेहतर तो रेलवे की नौकरी थी।
वहीं गोल्फर अभिनव जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के तुरंत बाद हुए एशियाड में रजत पदक विजेता अभिनव ने भी पुलिस की नौकरी का ठुकरा दिया। ओएनजीसी में असिस्टेंट फाइनेंन ऑफिसर के पद पर कार्यरत अभिनव ने सी क्लास के पुलिस पद को स्तरीय नहीं माना। इससे पूर्व राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक विजेता दीपक शर्मा ने भी सब इंस्पेक्टर पद नहीं स्वीकार किया था।
पहली बार हुई इतने बड़े स्तर पर खिलाडिय़ों की नियुक्ति
प्रदेश सरकार ने पहली बार राष्ट्रमंडल व एशियाई खेलों मे वर्ष 2010 के दौरान मेडल झटकने वाले खिलाडिय़ों को सब-इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर व डीएसपी के पद नवाजे थे। इससे पहले कोटा आधार पर खिलाडिय़ों को नियुक्त किया जाता था। इतने बड़े स्तर पर पहली बार खिलाडिय़ों को पुलिस सेवा में रखा गया था।
बेशक कुछ खिलाड़ी पुलिस की नौकरी विभिन्न कारणों से न कर रहे हों बावजूद इसके सरकार खिलाडिय़ों को खुश करने में लगी हुई है। यही कारण है सरकार अब कुछ खिलाडिय़ों को खेल विभाग में लाने की तैयारी कर रही है। खिलाडिय़ों को सहायक खेल निदेशक के पद पर नियुक्त किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके लिये सरकार की ओर से खिलाडिय़ों को इंतजार करने के संदेश दिये जा रहे हैं।












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