उत्तर प्रदेश: उर्दू शायरों को चाहिए राहुल का साथ

उत्तर प्रदेश न सही राजधानी में तो कांग्रेस अपने पुराने रूप में लौट रही है। एक ओर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव मुस्लिम बिरादरी को आकर्षित करने के लिए मस्जिदों व मजारों पर जाकर मन्नतें मांग रहे हैं जबकि मुराद राहुल गांधी की पूरी हो रही है वह भी बगैर मन्नत। शनिवार को बसपा के वरिष्ठ नेता सिराज मेंहदी ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया। हालांकि सिराज मेंहदी जनाधार खो चुके नेता हैं लेकिन पार्टी छोड़कर जाने से बसपा को कुछ नुकसान तो हुआ ही है।
सूत्रों से पता चलता है कि सिराज मेंहदी अपने साथ रईस अंसारी को भी ले गए। श्री अंसारी की उर्दू पत्रकारिता में अच्छी पैठ है और यदि रईस अंसारी जाते हैं दो एक दिनों में मुन्नवर राना के कांग्रेस में शामिल होने की खबर आ सकती है। कांग्रेस के पदाधिकारियों के अनुसार उपरोक्त लोगों की कांग्रेस आला कमान से बात चल रही है और जल्द ही वे पार्टी में षामिल हो जाएंगे।
कांग्रेसियों के अनुसार ये शायर राहुल गांधी के साथ कार्य करना चाहते हैं क्योंकि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी युवा होने के साथ एक बेहतरीन इंसान हैं जिस कारण वे देश व जनता को एक उचित नेतृत्व दे सकते हैं। उर्दू शायर मंजर भोपाली के भी कांग्रेस में जाने की सूचनाएं आ रही हैं यदि ऐसा होता है तो आने वाले दिनों में कई शायर भी कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं।
हालांकि कांग्रेस का कोई भी पदाधिकारी इसबात की पुष्टि करने को तैयार नहीं है लेकिन पार्टी के भीतर सेआ रही खबरों से यह बात पुख्ता हो जाती है कि शायरों को राहुल का साथ बहुत भा रहा है तथा वे राहुल के साथ ही कार्य करने के इच्छुक हैं।












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