बाबा के अनशन पर सरकार का कड़ा रूख

सरकार ने अब बाबा रामदेव से आमने-सामने की लड़ाई लड़ने का फैसला कर लिया है। पिछले दो दिन से यूपीए के मंत्रियों की तरफ से बाबा के खिलाफ बयान जारी किए जा रहे थे। सरकार ने यह भी कहा था कि बाबा रामदेव की ज्यादातर मांगें जायज नहीं हैं। सरकार ने यह भी कहा था कि काला धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने में कई तकनीकी पहलू हैं।
इस निर्णय के बाद से यूपीए सरकार के मंत्रियों के बीच बैठकों का दौर जारी है। सरकार बाबा को घेरने की तैयारियों में भी जुट गई है। बाबा रामदेव को संघ और बीजेपी का एजेंट बताने वाली सरकार अब बाबा की इस मुहिम पर लगने वाले पैसे की जांच कराने की भी मांग कर रही है।
यूपीए के ज्यादतर मंत्रियों ने अपने-अपने बयान जारी कर बाबा रामदेव से अब किसी तरह की बात न करने के बयान जारी किए हैं। सरकार ने बाबा रामदेव पर यह भी आरोप लगाया है कि साइकिल पर चलने वाले योग गुरू के पास इतना धन कहां से आया इसकी भी जांच होनी चाहिए।
सरकार के कड़े रूख और बयानबाजी के बाद से अन्ना हजारे के बाबा रामदेव के आंदोलन को सपोर्ट देने या न देने पर संशय बरकार हो गया है। इससे पहले प्रशांत भूषण ने संघ के लोगों का बाबा के आंदोलन में शामिल होने का विरोध किया था।












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