'भारत के 'भगोड़ों' की सूची पर गंभीर'

'भारत के 'भगोड़ों' की सूची पर गंभीर'
गृह मंत्री रहमान मलिक ने भी सूची की गड़बड़ी को भूलाकर संबंध को बेहतर करने पर ज़ोर दिया है. पाकिस्तान ने कहा है कि वह भारत की ओर से आई मोस्ट वांटेड लिस्ट यानि भगोड़ों की सूची को 'गंभीरता" से ले रहा है.

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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार शनिवार को पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तहमीना जांजुआ ने कहा कि पाकिस्तान उन सभी संदिग्धों की तलाश के भारत के निवेदन को 'गंभीरता" से ले रहा है, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वे पाकिस्तान में मौजूद हैं.

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जब तहमीना से इस सूची में सामने आ रही ग़लतियों के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था,''यह भारत की सूची है. भारतीय जिसका नाम चाहें, इसमें डाल सकते हैं. यह फ़ैसला करना उनका काम है कि किसे सूची में डालना है. जहां तक हमारी बात है, हमसे इस प्रकार का जो भी मामला उठाया जाता है, हम उसे पूरी गंभीरता से लेते हैं.''

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ग़ौरतलब है कि इसी साल मार्च में भारत ने पाकिस्तान को 50 भगोड़ों की एक सूची दी थी और दावा किया था कि यह लोग भारत में होने वाले चरमपंथी हमलों के लिए ज़िम्मेदार हैं और वह सभी इस समय पाकिस्तान में रह रहें हैं. सूची में पाकिस्तानी सेना के पांच अधिकारियों के भी नाम थे. इन अधिकारियों के नाम मुंबई हमलों के संबंध में सूची में डाले गए थे.

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लेकिन पिछले हफ़्ते इस सूची में कुछ ग़लतियां सामनें आई थीं. सूची में शामिल दो लोग भारत में रह रहें हैं. एक ज़मानत पर रिहा होकर मुंबई से सटे ठाणे में रह रहा है और दूसरा व्यक्ति मुम्बई की एक जेल में है.

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यह पूछे जाने पर कि क्या भारत ने सूची औपचारिक तौर पर वापस ले ली है, उन्होंने कहा, ''हमारे पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. यह केवल मीडिया में आई बात है.''

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उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, भारत के साथ, ''परिणामपरक और सार्थक बातचीत की दिशा में काम कर रहा है.'' पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक ने भी कहा है कि भारत के ज़रिए दी गई सूची में गड़बड़ी को बड़ा मुद्दा नहीं बनाना चाहिए.

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रहमान मलिक ने इस बारे में सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर अपनी राय देते हुए लिखा है, ''नौकरशाही में कुछ लोग इसी तरह से ग़लतफ़हमी पैदा करते हैं हैं. इसे भूलकर भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती बढ़ाने के लिए ईमानदारी से कोशिश करनी चाहिए.''

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चिदंबरम ने माना है कि सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि इस पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए सभी को मिलकर काम करने की ज़रुरत है.

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दूसरी तरफ़ भारत के गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने स्वीकार किया है कि सूची में ग़लतियों की वजह से गृह मंत्रालय शर्मसार हुआ है. लेकिन उन्होंने कहा कि इससे सरकार की विश्वसनीयता पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता और ना ही उन व्यक्तियों से माफ़ी मांगने की ज़रूरत है, जिनके नाम ग़लती से भगोड़ों की सूची में शामिल हो गए थे.

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शनिवार को एक भारतीय टीवी न्यूज़ चैनल सीएनएन-आईबीएन पर पत्रकार करण थापर के साथ बातचीत में चिदंबरम ने कहा कि ज़ाहिरी तौर पर यह घटना केंद्रीय गृह मंत्रालय को शर्मसार करती है. चिदंबरम ने कहा, ''यह शर्मनाक है, यह खेदजनक है. चूंकि सूची औपचारिक रूप से केंद्रीय गृह सचिव द्वारा सौंपी गई थी, लिहाज़ा हमने उसकी ज़िम्मेदारी ली है.''

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चिदंबरम ने ये भी मानने से इनकार कर दिया कि इस ग़लती से पाकिस्तान को भारतीय सूची को ख़ारिज करने का मौक़ा मिल जाएगा.

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उनका कहना था, ''मुझे नहीं लगता कि इससे भारत सरकार की विश्वसनीयता को कोई नुक़सान पहुंचा है. मेरा ख़्याल है कि यह घटना भारतीय एजेंसियों के लिए संकेत है कि वह और अधिक सतर्क रहें और पेशेवर बनें.''

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यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार को उन लोगों से माफ़ी मांगनी चाहिए जिनके नाम ग़लती से भगोड़ो की सूची में शामिल हो गए थे, चिदंबरम ने कहा, ''मैं नहीं समझता कि यह कोई ऐसा मामला है, जिसमें हमें किसी से माफ़ी मांगनी चाहिए. हम खेद जता चुके हैं कि सूची में सुधार नहीं करना एक मानवीय ग़लती थी. उस स्तर पर मैं समझता हूं कि हमने खेद जताया है और हमें अभी भी खेद है. लेकिन मैं समझता हूं कि आप इस मामले को ज़्यादा दूर तक ले जा रहें हैं.''

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चिदंबरम ने कहा कि दोनों लोग क़ानून से भागे हुए थे और उनके ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए और वह बाद में गिरफ़्तार हुए थे.

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