यूपीए सरकार के 2 साल और 2 उपलब्धियां- मंहगाई और भ्रष्टाचार

Manmohan Singh, Sonia Gandhi
नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के दरिया में गोते लगाती मनमोहन सिहं की यूपीए सरकार ने दो साल पूरे कर लिए हैं। दो साल पहले इसी दिन मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने दूसरी बार देश की सत्ता की बागडोर अपने हाथों में थामी थी।

लेकिन तब शायद खुद मनमोहन को नहीं पता रहा होगा कि आने वाले दो साल उनपर कितने भारी पड़ने वाले हैं। इन दो सालों के बारे में याद करने पर सिर्फ दो ही बातें याद आती हैं घोटाले और मंहगाई। घोटालों ने सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं तो दिनों दिन बढ़ती मंहगाई ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया।

भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला 2जी स्पैक्ट्रम घोटाला, खेलों का सबसे बड़ा घोटाला कॉमनवेल्थ घोटाला और सेना का आदर्श घोटाला सारे घोटाले इन्हीं दो सालों में सामने आए। 2जी मामले में पूर्व दूसंचार मंत्री और डीएमके सांसद और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की बेटी कनीमोझी तिहाड़ जेल में हैं, तो कॉमनवेल्थ गेम्स समिति के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी भी तिहाड़ जेल में बंद है। कॉमनवेल्थ घोटाले की आंच दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के दामन तक लगी। इन सभी में करीब 1 लाख करोड़ रुपए का घोटाला हुआ।

तो महाराष्ट्र में हुए आदर्श घोटाले में मामले इतना तूल पकड़ लिया कि कांग्रेस को अपने मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को गद्दी से हटाना पड़ा। ये सारे घोटाले साफ-सुथरी छवि वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की नाक के नीचे होते रहे जिससे प्रधानमंत्री की छवि खराब हुई। अब अगले चुनाव में कांग्रेस के पास ईमानदार नेता के मान पर शायद मनमोहन सिंह का कार्ड भी नहीं होगा।

भ्रष्टाचार से आम आदमी एस हद तक त्रस्त हो गया कि समाजसेवी अन्ना हजारे को भ्रष्टाचार के खिलाफ आमरण अनशन करना पड़ा। अन्ना की इस मुहिम ने आंदोलन का रुप ले लिया और सरकार को मजबूर होकर लोकपाल विधेयक की संयुक्त ड्राफ्टिंग बनानी पड़ेगी। सरकार का दावा है कि संसद के मानसून सत्र में ये बिल पेश हो जाएगा। अब बात करें मंहगाई बढ़ते भ्रष्टाचार की तरह यूपीए सरकार मंहगाई पर भी लगाम लगाने में नाकाम रही। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ी तेल की कीमतों ने आग में घी का काम किया। सरकार अभी भी मंहगाई की दर घटाने के लिए जूझती दिख रही है। पिछले एक साल में तो हद ही पार हो गई। एक साल में पेट्रोल 23 रुपए महंगा हुआ।

तो ये थे यूपीए सरकार के घोटालों, भ्रष्टाचार और मंहगाई से भरे दो साल। इन दो सालों में भ्रष्टाचार और घोटालों की आंच से साफ छवि वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी ना बच पाए। उनपर सबकुछ जानते हुए आंखे मूंद कर बैठे रहने का आरोप लगा। ये दो साल यूपीए सरकार की सबसे बड़ी नाकामयाबी साबित करते हैं।

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