'पाकिस्तान जैसी कार्रवाई फिर करने को तैयार'

उल्लेखनीय है कि अमरीका ने पाकिस्तान में एक गुप्त अभियान में अल क़ायदा नेता ओसामा बिना लादेन को निशाना बनाया था जिसके बाद पाकिस्तान और अमरीका के रिश्तों में दरार आ गई है. ओबामा का कहना था कि अमरीका को पाकिस्तान की संप्रभुता का ख़्याल है लेकिन अमरीका किसी को भी अनुमति नहीं दे सकता कि वो अमरीका और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ हमलों की योजना बनाए और अमरीका उस पर कार्रवाई न करे.
;हालांकि राष्ट्रपति ओबामा ने माना कि अफ़गानिस्तान में हिंसा को समाप्त करने के लिए तालिबान के साथ गंभीर वार्ताएं ज़रुरी ही होंगी. राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने यूरोप दौरे से पहले बीबीसी से विशेष बातचीत कर रहे थे.
;यह पूछे जाने पर कि अगर उन्हें अल क़ायदा के किसी बड़े नेता या तालिबाने बड़े नेता मुल्ला उमर की पाकिस्तान या किसी अन्य देश में मौजूदगी के बारे में पता चले तो वो क्या करेंगे, ओबामा का जवाब था, ''हमारा काम अमरीका की रक्षा करना है.""
;ओबामा का कहना था, ''हम पाकिस्तान की संप्रभुता का सम्मान करते हैं लेकिन हम किसी को अनुमति नहीं दे सकते कि वो अमरीका या उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ हमलों की योजनाएं बनाए."" उन्होंने कहा, '' हम किसी भी ऐसी योजना को फलीभूत होने नहीं दे सकते. हम उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे.""
;तनावपूर्ण रिश्ते
;दो मई को अमरीका की कमांडो कार्रवाई में अल क़ायदा नेता बिन लादेन की मौत हो गई थी. अमरीकी कमांडो ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में यह कार्रवाई की थी. ऐबटाबाद के जिस परिसर में लादेन मारे गए वो पाकिस्तानी सैन्य अकादमी के पास ही है और लादेन के पाकिस्तान में मिलने से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि वो लादेन को समर्थन दे रहे थे.
;हालांकि पाकिस्तान की सरकार ने इस तरह के आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि अमरीकी हमले ने पाकिस्तानी संप्रभुता को ठेस पहुंचाई है. इसी महीने पाकिस्तानी सांसदों ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा है कि पाकिस्तान आगे से 'ऐसी कोई कार्रवाई बर्दाश्त नहीं करेगा और ऐसी कोई एकतरफा कार्रवाई क्षेत्र और पूरी दुनिया की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा साबित होगी."
;अफ़गानिस्तान में चरमपंथ के ख़िलाफ चल रहे युद्ध में पाकिस्तान की बड़ी भागेदारी रही है. हालांकि पाकिस्तान की ज़मीन से पाकिस्तान अफ़गानिस्तान क्षेत्र में अमरीका के ड्रोन हमले दोनों देशों के बीच तनाव की एक बड़ी वजह रहे हैं.
;अफ़गानिस्तान के बारे में ओबामा का कहना था कि यह संघर्ष सेना के स्तर पर सुलझ नहीं सकता है. उनका कहना था कि तालिबान को पीछे धकेलना होगा ताकि वो राजनीतिक समझौते के लिए तैयार हों. उन्होने कहा, '' आखिरकार हमें तालिबान से बात करनी होगी. तालिबान को अल क़ायदा से अपने संबंध तोड़ने होंगे. हिंसा छोड़नी होगी और अफ़गानिस्तान के संविधान का सम्मान करना होगा.""
;ओबामा रविवार से यूरोप की यात्रा शुरु कर रहे हैं और इस यात्रा में वो ब्रिटेन, फ्रांस और पोलैंड जाएंगे.












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