शशि हत्याकांड: क्या होगा माया के विधायक का?
हाल ही में न्यायालय ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता मनोज गुप्ता की हत्या के मामले सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी विधायक शेखर तिवारी को उम्रकैद की सजा हुई। श्री तिवारी के उम्रकैद के बाद बसपा की चारों ओर फजीहत हुई। अब दूसराअवसर है कि बसपा के विधायक न्यायालय के सामने होंगे। छात्रा शशि की हत्या के मामले में मिल्लीपुर विधायक आनन्द सेन यादव पिछले तीन वर्ष से जेल में सजा काट रहे हैं। आनन्दसेन यादव के भाग्य का फैसला मंगलवार को होगा।
एक दलित युवती के अपहरण और हत्या के मामले में श्री सेन मु य अभियुक्त है। मामले में आनन्दसेन के ड्राइवर और सीमा आजाद नाम की एक महिला भी आरोपी है। सीमा आजाद जमानत पर जेल से बाहर है लेकिन विधायक और पूर्व मंत्री आनन्दसेन तथा ड्राइवर विजयसेन करीब तीन वर्षो से जेल में हैं। मुकदमें में दो पत्रकारों समेत कुल 32 गवाहों के बयान दर्जकराये गये है। मुकदमें की खास बात यह है कि शशि का शव पुलिस अभी तक नहीं खोज पायी है लेकिन फिर भी न्यायालय में हत्या का मुकदमा चल रहा है।
ज्ञात हो कि डा. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कर्मचारी राजेन्द्र प्रसाद ने अपनी बेटी शशि की गुमशुदगी की सूचना फैजाबाद जिले के कुमारगंज थाने में 23 अक्टूबर 2007 में दर्ज करायी थी। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी जब शशि का कुछ पता नहीं चला तो पिता ने 31 अक्टूबर 2007 को आनन्दसेन के ड्राइवर विजयसेन और सीमा आजाद पर शशि की हत्या कर देने की आशंका जताते हुए नामजद रिपोर्ट लिखायी।
मिल्कीपुर से बसपा विधायक आनन्द सेन को एफआईआर में नामजद नही किया गया था। लेकिन जब हत्या की जांच चली तो परत दरपरत कई हकीकतें सामने आने लगीं। उसके बाद विधायक पर कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 201 अर्थात अपराध के साक्ष्य गायब करने, धारा 364 अपहरण और दलित उत्पीडन अधिनियम के तहत उन्हें आरोपी बनाया गया। कई लोगों के मामले में बयान दर्ज किये गए अब अदालत मंगलवार को मामले में अपना फैसला सुनाएगी।













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