राजनीतिक खेल का अध्याय होगा बाबा रामदेव का अनशन?

स्वामी रामदेव ने बुधवार को मीडिया को बुलाकर कहा कि वे 4 जून से अनशन पर बैठने जा रहे हैं। इस अनशन में बाबा के मुद्दे विदेशों में जमा काला धन को वापस लाने, व इसमें दोषी पाए जाने वालों पर देशद्रोह का मुकदमा। देश में ज्यादा मूल्य के करंसी नोट्स बंद किए जाने की मांग और जन लोकपाल बिल में भ्रष्टाचार के खिलाफ मृत्युदंड के प्रावधान की मांग होगी। अगले महीने की चार तारीख की ओर रुख करने से पहले अगर दो महीने पीछे जायें तो आपको याद होगा कि बाबा रामदेव ने नई दिल्ली में एक रैली की थी।
उस रैली में कई बड़े समाजसेवियों के साथ डेढ़ लाख से ज्यादा आम लोग एकत्र हुए। इसमें कोई शक नहीं कि बाबा की उस रैली ने उनका कद कई ऊंचा कर दिया था। तभी से बाबा की प्रमुख मांग काले धन को स्वदेश वापस लाने की है। इसमें कोई शक नहीं है कि कांग्रेस काला धन वापस लाना चाहती ही नहीं है, शायद इसीलिए सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बावजूद अब तक हसन अली के अलावा एक भी व्यक्ति नहीं पकड़ा गया। यही नहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस पर संसद में कोई बयान भी नहीं दिया।
कांग्रेस की इस चुप्पी के पीछे एक चाल नज़र आ रही है। हो सकता है कि बाबा का कद छोटा करने के लिए कांग्रेस ने अप्रत्यक्ष रूप से पहले अन्ना हजारे को आमरण अनशन के लिए उकसाया हो।
जरा सोचिये अन्ना के अनशन के तीन दिन के भीतर 30 साल से लंबित पड़े लोकपाल विधेयक को कांग्रेस सरकार ने मंजूरी दे दी। अन्ना का कद ऊंचा करने में मीडिया ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी देखते ही देखते अन्ना भगवान बन गये।
इन सबके साथ कांग्रेस का बाबा रामदेव को छोटा दिखाने का मकसद पूरा हो गया। आप सोच रहे होंगे कि कांग्रेस ने आखिर कार क्यों किया? उसका जवाब भी सीधा है, बाबा रामदेव अपनी राजनीतिक पार्टी तैयार कर रहे हैं, जिसका जनाधार काफी मजबूत और सशक्त है। कांग्रेस के मन में सत्ता छिनने का डर भी इसके पीछे बड़ा कारण है। यही कारण है कि बाबा की रैली के दौरान कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने योग गुरु पर जमकर कीचड़ उछाला था।
खैर कांग्रेस ने अप्रत्यक्ष रूप से बाबा को चुनौती दे दी है। अब देखना यह है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई में बाबा कितनी दूर तक जाते हैं।












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