अदालत ने इशरत मामले की जाँच रोकी

सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश ये दलील सुनने के बाद दिया कि तीन सदस्यों वाले इस जाँच दल में केवल एक जाँच अधिकारी बच गया है. विशेष जाँच दल के काम-काज पर गुजरात पुलिस के ऐसे कुछ अधिकारियों ने सवाल उठाया था जिनपर उस टीम में शामिल होने का आरोप है जिसने कथित रूप से इशरत जहाँ की नक़ली मुठभेड़ में हत्या की थी.
गुजरात पुलिस के कुछ लोगों पर ये आरोप हैं कि उन्होंने 15 जून 2004 को अहमदाबाद के बाहरी इलाक़े में एक कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में इशरत जहाँ और तीन अन्य लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. अहमदाबाद पुलिस ने चारों मृतकों पर चरमपंथी संगठन लश्करे-तैबा का सदस्य होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करना चाहते थे.
जून 2004 में इशरत जहाँ समेत चार लोग मुठभेड़ में मारे गए थे
पुलिस अधिकारियों की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि तीन सदस्यों वाला जाँच दल एक सदस्यीय दल बनकर रह गया है. उन्होंने कहा कि गुजरात हाइकोर्ट के आदेश के बाद विशेष जाँच दल गठित की थी जिसमें भारतीय पुलिस सेवा के तीन वरिष्ठ अधिकारी - करनैल सिंह, मोहन झा और सतीश वर्मा - शामिल किए गए.
मगर याचिकाकर्ताओं ने शिकायत की कि अब इस जाँच दल में केवल सतीश वर्मा ही रह गए हैं. गुजरात हाइकोर्ट ने 22 अप्रैल को आदेश जारी कर करनैल सिंह को जाँच दल से मुक्त कर दिया था और कहा था कि केवल सतीश वर्मा इस मामले की जाँच करेंगे. अदालत ने तीसरे सदस्य मोहन झा को जाँच दल का प्रशासनिक दायित्व संभालने के लिए कहा.
उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं में से एक, वडोडरा के पुलिस उपायुक्त गिरीश लक्ष्मण सिंघल ने कहा कि जाँच एक दल से होना चाहिए मगर उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जाँच केवल एक व्यक्ति करेगा. दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ ने विशेष जाँच दल की कार्रवाई को स्थगित कर दिया.












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