सीएमओ हत्याकांड में नया मोड़, करोड़ों के घोटाले का होगा राजफाश

जिन अधिकारियों के नाम डीजीपी को सौंपी गई है उनपर आरोप है कि करोड़ों के हुए घोटले में यह सभी लोग शामिल हैं। एंटी करप्शन टीम के जांच अधिकारियों का कहना है कि घोटाले का राज न फाश हो जाए इसीलिए सीएमओ की हत्या की है और डा. विनोद आर्या भी इसी घोटाले के शिकार बन गये। उल्लेखनीय है कि बीते छह महीने के अंदर स्वास्थय एवं परिवार कल्याण विभाग में सीएमओ पद पर तैनात रहे दो मुख्य चिकित्सा अधिकारियों डॉ विनोद कुमार आर्या और डॉ बीपी सिंह की हत्या की जा चुकी है। दो हत्याएं होने के बाद शासन पर खलबली मच गई थी। पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए। इसमें विभाग में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बडि़यां होने की बात सामने आई।
चार सदस्यीय एंटी करप्शन की टीम परिवार कल्याण विभाग में दस्तावेजों को खंगालने में जुटी है। जांच के लिए टीम ने डीजीपी से कुछ समय मांगा है। अभी तक इस मामले में एक डिप्टी सीएमओ सहित आधा दर्जन कर्मचारियों को जेल भेजा जा चुका है। डीजीपी अपराध एवं कानून व्यवस्था बृजलाल ने बताया कि जब्त किए गए दस्तावेज की छानबीन चल रही है। उनका कहना है कि घोटालों का खुलासा जांच के बाद ही पता चल पाएगा। एंटी करप्शन की टीम इसमें लगी है और दस्तावेजों की जांच कर रही है। वहीं क्राइम ब्रांच ने मेरठ के भी एक ठेकेदार से लंबी पूछताछ की है। हालांकि एक सप्ताह बीतने के बाद भी एसटीएफ, पुलिस व क्राइम ब्रांच की टीमें हत्या की वजह तक नहीं पहुंच सकी हैं। सीएमओ कार्यालय रविवार को भी पुलिस के निशाने पर रहा।












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