असम नहीं पहुंच पाया मायावती का हाथी

Mayawati
लखनऊ। देश में अपने चुनाव निशान के बलबूते अलग पहचान बना चुकी बहुजन समाज पार्टी असम विधान सभा चुनाव में अपने चुनाव निशान हाथी के साथ नहीं उतर सकी। राष्‍ट्रीय दल की मान्यता पाने के बाद भी बसपा असम में अपने चुनाव निशान से वंचित रहेगी। कारण यह कि असम में हाथी चुनाव निशान असम गण परिषद को आवंटित है।

पार्टी का कहना है कि असम में पार्टी प्रत्यक्ष रूप से सहयोगी दल के रूप में कार्य कर रही है वह अपने सहयोगी को समर्थन दे रही है फिर चाहे वह किसी भी चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़े। बहुजन समाज पार्टी की स्थापना के 27 वर्ष बीत चुके हैं। देश की सबसे बड़ी विधान सभा में सफलता के झण्डे गाड़ बसपा के चुनाव निशान हाथी से सभी परिचित हैं। बावजूद इसके असम में पार्टी चुनाव निशान के साथ चुनाव समर में चाह कर भी नहीं उतर सकती।

बसपा की स्थापना 14 अप्रैल 1984 में हुई थी। उसी समय से हाथी चुनाव निशान के साथ बसपा ने अपनी राजनैतिक सफर शुरू किया। नीले झण्डे और हाथी चुनाव चिन्ह के साथ बसपा ने पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनायी। बसपा की विचार धारा वाले लोग भी चुनाव निशान से भली प्रकार परिचित हैं। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि असम में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं। वहां बसपा अपने चुनाव निशान हाथी के साथ चुनाव नहीं लड़ रही है क्योकि उसे असम छोड़कर पूरे देश में यह चुनाव चिन्ह आवंटित है।

हाथी चुनाव निशान असम की एक क्षेत्रीय पार्टी का आवंटित है। पार्टी पदाधिकारी भले ही कहते हों कि इससे उन्हें चुनाव में कोई फर्क नहीं पड़ता परन्तु बसपा चुनावी विचार धारा वालों के लिए चुनाव निशान बहुत अहमियत रखता है। पार्टी के एक बड़े पदाधिकारी का कहना है कि असम में पार्टी सीधे चुनाव नहीं लड़ रही है। पार्टी की विचारधारा से जुड़े लोग चुनाव मैदान में और वे जिस चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे पार्टी उनके साथ होगी। असम में चार व 11 अप्रैल को विधान सभा चुनाव होने हैं।

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