बिहार में लोकसेवा अधिकार विधेयक पारित

बिहार में नीतीश कुमार की सरकार दूसरी बार जीत कर आई है.बिहार विधानसभा में प्रस्तुत' लोकसेवा का अधिकार अधिनियम 2011 ' नाम से एक विधेयक सोमवार को ध्वनिमत से पारित हो गया.राज्य सरकार के दफ्तरों में निर्धारित समय-सीमा के भीतर लोगों के काम निबटाने के क़ानूनी प्रावधान इस विधेयक के ज़रिये किये जा रहे हैं.बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों से पारित होने और राज्यपाल के अनुमोदन के बाद यह विधेयक क़ानून का रूप ले लेगा.
अंग्रेजी में इसे ' राइट टू पब्लिक सर्विस डिलिवरी एक्ट ' नाम दिया गया है.इसी तरह का क़ानून मध्यप्रदेश में भी लागू है.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते हैं, '' मकसद इसका ये है कि किसी तरह का प्रमाणपत्र और लाइसेंस लेने या बिजली-पानी कनेक्शन चाहने वाले आम आदमी का काम सरकारी दफ्तरों में समय पर हो जाय.साथ ही रिश्वतखोरी प्रवृत्ति को सख्ती से रोका जा सके.""
लेकिन दूसरी तरफ़ राज्य के विपक्षी दलों का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों में यहाँ जो घूसखोरी आसमान छूने लगी है, उसे इस विधेयक के प्रावधानों से नियंत्रित करने का दावा आँख में धूल झोंकने जैसा है.विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता अब्दुल बारी सिद्दीक़ी ने कहा,''ख़ुद मुख्यमंत्री की जो ढेर सारी घोषणाएं पांच साल की लंबी अवधि में भी ज़मीन पर नहीं उतर पाई और भ्रष्ट अधिकारियों के लिए सोने की मुर्ग़ी बन गयीं, उनके लिए कौन सा विधेयक लाया जा रहा है? ""
इस 'लोकसेवा का अधिकार' विधेयक के तहत जिन 25 लोकसेवाओं को पहले चरण में शामिल किया गया है, उनमें जाति, आवास और आय से सम्बंधित प्रमाणपत्र के अलावा कई तरह के लाइसेंस और पंजीयन का काम समय सीमा के तहत निबटाना सरकारी कर्मियों के लिए ज़रूरी कर दिया गया है.ऐसा नहीं कर पाने वाले बाबूओं को 250 रूपए से लेकर ढाई हज़ार रूपए तक जुर्माने का क़ानूनी प्रावधान किया गया है.












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