चेत जाओ...सूख सकती हैं गंगा मैया
वाराणसी की पहचान गंगा के निर्मल जल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। गंगा का जलस्तर इस तेजी से गिर रहा है कि विगत एक वर्ष के भीतर गंगा में ढाई फीट पानी घट गया है। जिन घाटों पर बैठकर कभी लोग गंगा के निर्मल जल में स्नान कर पापों का नाश किया करते थे उन घाटों से गंगा का जल दूर हो गया है। वाराणसी में ऐसे तमाम पक्के घाट हैं जहां बैठकर स्नान करने की बात अब बीते दिनों की हो गयी हैं। वाराणसी के मंदिरों के पंडे कहते हैं कि यदि इसी प्रकार प्रदूषण बढ़ता रहा तथा जल स्तर घटता रहा तो लोग गंगा के निर्मल जल को तरसेंगे।
केन्द्रीय जल आयोग के अधिशासी अभियंता राजेन्द्र प्रसाद के अनुसार पिछले एक वर्ष से लगातार गंगा का जल स्तर घट रहा है। गंगा के घटते जलस्तर से सभी परेशान हैं। श्री प्रसाद का कहना है कि गंगा के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा भी सामान्य से कम हो गयी है। गंगा को निर्मल व स्वच्छ बनाने में सक्रिय भूमिका अदा कर रहे कछुए, मछलियां एवं अन्य जलजीव अब समाप्ति की कगार पर हैं।
गौरतलब है कि अकेले वाराणसी में ही गंगा को स्वच्छ करने के लिए 1600 करोड़ रुपये खर्च किए गये। कागजों पर खर्च हुई इस रकम के बाद भी गंगा के पानी में प्रदूषण की मात्रा कम नहीं हुई। पर्यावरणविदों का कहना है कि लोगों व प्रशासन की लापरवाही के चलते गंगा की यह हालत हो गयी है। पर्यावरणविद् प्रो. वीर भद्र मिश्र ने कहा गंगा घाट पर पहुंचकर कहा कि गंगा के जल का पुन: निर्मल बनाने के लिए सरकार ने अरबों रूपया खर्च किए जाने की बात की लेकिन हकीकत में क्या हुआ किसी को कुछ नहीं पता। सरकारी दावों व हकीकतों की तस्वीर सभी के सामने हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न जिलों के गंदे नालों का पानी जब तक गंगा में गिरता रहेगा तब तक गंगा का साफ रहना मुश्किल है।













Click it and Unblock the Notifications