बिल गेट्स बिहार के दौरे पर

बिल गेट्स बिहार के दौरे पर
शालू यादव, बीबीसी संवाददाता, पटना

दुनिया के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी और माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स और उनकी पत्नी मेलिंडा गेट्स तीन दिन के भारत दौरे पर हैं.भारत दौरे के पहले दिन गेट्स दम्पती ने स्वास्थ्य मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद से मुलाक़ात की और देश में स्वास्थय सेवाओं को बेहतर बनाने और पोलियो तथा एड्स के उन्मूलन पर चर्चा की.

इस यात्रा के दौरान बिल और मेलिंडा गेट्स का ध्यान बिहार पर केंद्रित होगा. गेट्स दम्पती बुधवार पटना जिले के जमसौत गांव का दौरा कर वहां की स्वास्थ्य सेवाओं का जायज़ा ले रहे हैं.बिहार का स्वास्थ्य क्षेत्र भारत के और राज्यों के मुक़ाबले बेहद कमज़ोर माना जाता है.

मेलिंडा गेट्स ने दिल्ली में हुए एक सम्मेलन में नवजात शिशुओं और माताओं के स्वास्थ्य सुधार पर ज़ोर दिया.विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में 55 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार होते हैं, और ये आंकड़ा बिहार में भी लगभग इतना ही है. इसके अलावा काला अज़ार, खसरा और टीबी जैसी बीमारियां बिहार में चरम पर हैं.

साल 2010 में बिल गेट्स ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ एक क़रार किया था, जिसके तहत राज्य में पोलियो, काला अज़ार, टीबी और कुपोषण जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए गेट्स की परोपकारी संस्था ने 8 करोड़ डॉलर की राशि प्रदान की थी.इस भागीदारी का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में बच्चों और माताओं के मृत्यु दर में 40 प्रतिशत तक की गिरावट लाना होगा.

अपने एक दिन के बिहार दौरे के दौरान बिल और मेलिंडा गेट्स जमसौत में स्वास्थय कर्मियों और कुछ गर्भवती महिलाओं से उनके अनुभव और चुनौतियों के बारे में बातचीत करेंगें.बिहार में मातृत्व मृत्यु दर देश में सबसे ज़्यादा है.

बिहार यात्रा के दौरान बिल गेट्स राज्य सरकार के साथ हुई 8 करोड़ डॉलर की भागीदारी की प्रगति का जायज़ा भी लेंगें.परोपकारी संस्था बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की सह-संस्थापक मेलिंडा गेट्स ने मंगलवार को दिल्ली में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए नवजात शिशुओं और माताओं के स्वास्थ्य सुधार पर ज़ोर दिया.

मेलिंडा का कहना था कि बेहतर तकनीक के इस्तेमाल और उसके सस्तीकरण से भारत में माताओं और नवजात शिशुओं का जीवन बचाया जा सकता है.बिल गेट्स ने इस दशक को 'टीकाकरण के दशक" का नाम दिया हैबिल गेट्स ने इस दशक को 'टीकाकरण के दशक" का नाम दिया है जिसके ज़रिए विश्व भर में खसरा, पोलियो और हैजा जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए बच्चों को टीके लगाए जाएंगें.साथ ही इस साल बिल गेट्स का ध्यान पोलियो को जड़ से ख़त्म करना होगा.

भारत सरकार ने पोलियो उन्मूलन मुहिम में पिछले दो सालों में अच्छी प्रगति दर्ज की है. जहां 2009 में भारत में 714 पोलियो के केस थे, वहीं 2010 में पाया गया कि भारत में केवल 41 पोलियो के केस बचे हैं.ग़ौरतलब है कि बिहार में पिछले छह महीनों में एक भी पोलियो का केस सामने नहीं आया है. हांलाकि काला अज़ार, टीबी, खसरा और मलेरिया के आंकड़ों में ऐसी प्रगति देखने को नहीं मिली है.

पोलियो उन्मूलन के लिए गेट्स फाउंडेशन, रोटरी इंटरनैश्नल और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाएं मिलकर एक मुहिम चला रही हैं.विश्व भर में पोलियो के कुछ 1300 के क़रीब केस हैं, और ये केस केवल भारत, पाकिस्तान, अफ्ग़ानिस्तान और नाइजीरिया में पाए गए हैं.विश्व भर में पोलियो का 99 प्रतिशत खात्मा हो चुका है और आख़िरी 1 प्रतिशत को जड़ से मिटाने के लिए गेट्स फाउंडेशन, रोटरी इंटरनैश्नल और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाएं मिलकर एक मुहिम चला रही हैं.

अगर पोलियो को अगले कुछ सालों में जड़ से ख़त्म कर देने में कामयाबी हासिल होती है, तो चेचक के बाद ये दूसरी बीमारी होगी जो विश्व भर से हमेशा के लिए मिट जाएगी.विश्व टीबी दिवस यानि 24 मार्च को बिल गेट्स दिल्ली के लाला रामस्वरुप टीबी अस्पताल का दौरा करेगें, जिसके बाद वे विज्ञान और तकनीक मंत्री कपिल सिब्बल से मुलाक़ात करेंगें.

इस बैठक में बिल गेट्स टीबी के लक्षणों का जल्द पता लगाने के लिए नई तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा करेंगें.भारत में हर साल क़रीब 20 लाख टीबी के केस सामने आते हैं, और आंकड़ों के अनुसार हर तीन मिनट में दो भारतीय मरीज़ टीबी की मौत का शिकार होते हैं.गेट्स फाउंडेशन भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र के सुधार के लिए अब तक एक अरब डॉलर की राशि दे चुका है.

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